नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की विकराल जीत के बाद बिहार भाजपा के नेताओं को नसीहत दी है कि विजय का घमंड ना आने पाए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर बुधवार को अमित शाह ने बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ एक बैठक की। सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में पार्टी और गठबंधन की बंपर जीत पर चर्चा हुई। शाह ने बैठक में मौजूद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत तमाम नेताओं से कहा कि यह जीत सामूहिक जीत है।
सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने कहा- ‘सभी नेताओं ने परिश्रम की पराकाष्ठा की है। चुनाव में एक प्रतिशत का योगदान भी बहुत बड़ा होता है, लेकिन कोई नेता यह न सोचे कि जीत उसकी वजह से मिली है। ऐसा सोचना घमंड पैदा करता है।’ शाह ने बिहार के नेताओं और मंत्रियों को पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में होने वाले चुनाव के मद्देनजर कहा कि सभी तैयार रहें और किसी को पार्टी का काम करने कहीं भी भेजा जा सकता है। उन्होंने इसके लिए ‘जहां कम, वहां हम’ का मंत्र दिया और कहा कि जहां संगठन कमजोर पड़े, वहां जाकर उसे ताकत देनी है।
बता दें कि बिहार के चुनाव में बीजेपी पहली बार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई है। उसने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 89 कैंडिडेट जीत गए। 101 सीट लड़ी जेडीयू के भी 85 नेता एमएलए बने हैं। एनडीए के कुल 202 विधायक जीते हैं। 243 सदस्यों की विधानसभा में यह दो तिहाई बहुमत से भी ज्यादा का नंबर है। विपक्षी महागठबंधन को 35 सीटों पर ही विजय हासिल हो सका। तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) मुख्य विपक्षी दल का दर्जा छिनते-छिनते बचा, जिसे 25 सीट पर जीत मिली। 23 सीट होने पर तेजस्वी को नेता विपक्ष का पद नहीं मिलता और इस हैसियत से मिल रही कैबिनेट मंत्री स्तर की सुविधाएं भी छिन जातीं।
