लाइफ जैकेट पहने एक मां… और उसके सीने से लिपटा उसका मासूम बेटा… क्रूज हादसे की भयावह तस्वीर…

लाइफ जैकेट पहने एक मां… और उसके सीने से लिपटा उसका मासूम बेटा। जब दोनों के शव बरगी डैम के पानी से बाहर निकाले गए, तो यह दृश्य देखकर लोगों की रूह कांप उठी। यह मंजर उस दर्दनाक हादसे के बाद का था, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया।

मौके पर मौजूद लोग हों या सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को देखने वाले—हर आंख नम हो गई। यह सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि ममता की वह आखिरी झलक थी, जो मौत के बाद भी जिंदा रही। मां आखिरी सांस तक उस भयावह त्रासदी से जूझती रही, लेकिन अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा। मौत भी उसके आंचल से मासूम को अलग नहीं कर सकी। अथाह पानी के बीच से जब यह दृश्य सामने आया, तो हर दिल सिहर उठा।
यह तस्वीर सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं कहती, बल्कि उस अटूट ममता की गवाही देती है, जो जीवन के पार भी अपने बच्चे को थामे रहती है। राहत-बचाव कार्य में जुटी टीम का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें चार से पांच सदस्यों की टीम सुबह मां और बेटे के शव को बरगी डैम से बाहर निकाल रहे हैं।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर गुरुवार, 30 अप्रैल की शाम एक ऐसा हादसा हुआ जो कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गया। पर्यटकों से भरा एक क्रूज नर्मदा नदी के बैकवाटर में डूब गया। जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कई लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, अब तक केवल 9 लोगों के ही शव बरामद हुए हैं और कई अभी भी लापता हैं। बचाव अभियान अभी जारी है।

क्रूज पर मौजूद लोगों ने बताया कि शाम करीब पांच बजे क्रूज बैकवाटर में पहुंचा था। तभी मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवाएं चलने लगीं और पानी में ऊंची लहरें उठने लगीं। कुछ ही पलों में क्रूज डगमगाने लगा और फिर उसमें पानी भरने लगा। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कोई लाइफ जैकेट ढूंढ रहा था, कोई अपने परिजनों को थाम रहा था।
मां के सीने से लिपटा मिला मासूम

चार घंटे मौत से लड़ते रहे रियाज

72 साल के रियाज हुसैन उस क्रूज पर अपने परिवार के साथ सवार थे। जैसे ही क्रूज में पानी भरने लगा, उन्होंने खुद को संभाला। क्रूज का एक छोटा हिस्सा पानी से करीब दो फीट ऊपर था। रियाज ने वहीं खुद को टिका लिया। वहीं, कुछ ही मिनटों में पानी उनकी गर्दन तक आ गया।

रियाज बताते हैं कि चारों तरफ अंधेरा था। लहरों की भयावह आवाजें दिल दहला रही थीं। उस वक्त उन्हें लगने लगा था कि अब बचना मुश्किल है। उनके मन में सिर्फ एक ही ख्याल था, सब डूब रहे हैं, अब मैं भी डूब जाऊंगा। वहीं, उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
करीब चार घंटे तक वह उसी हालत में डटे रहे। शरीर ठंड से कांप रहा था। तभी बाहर से आवाजें सुनाई दीं। रियाज ने पूरी ताकत से क्रूज की दीवारों पर हाथ मारे। रेस्क्यू टीम ने गैस कटर से क्रूज का ऊपरी हिस्सा काटा और उन्हें बाहर निकाला। बचाव के बाद भी रियाज की आंखों में आंसू है। हादसे के बाद से उनकी पत्नी और समधन अब भी लापता हैं।
बेटे का पहला जन्मदिन डरावने हादसे में बदल

जबलपुर के रोशन आनंद के लिए उनके बेटे का पहला जन्मदिन खुशियों भरा होना चाहिए था, लेकिन वो एक डरावने हादसे में बदल गया।

रोशन बताते हैं कि जैसे ही क्रूज अनियंत्रित हुआ, वहां मौजूद कर्मचारियों ने यात्रियों की मदद करने के बजाय खुद की जान बचाना ज्यादा जरूरी समझा और सीधे कूदकर भाग गए। हालत इतनी खराब थी कि यात्रियों को लाइफ जैकेट तक नहीं दी गई। बाद में लोगों ने खुद ही केबिन का कांच तोड़कर जैकेट निकाली।
करीब आधे घंटे तक लोग मौत और जिंदगी के बीच जूझते रहे थे। आसपास मौजूद दूसरे क्रूज से भी कोई मदद नहीं मिली। ऐसे में रोशन और बाकी यात्रियों ने हिम्मत दिखाई-डस्टबिन से पानी बाहर फेंकते रहे और किसी तरह हालात संभालकर अपनी जान बचाई।
बच्ची की कांपती आवाज ने सबको रुला दिया

रेस्क्यू टीम की वैन में सहमी बैठी एक बच्ची ने पत्रकारों से जो कहा, वह सुनकर कलेजा मुंह को आ जाता है। कांपती आवाज में उसने बताया कि एकदम से क्रूज पलट गया था, पूरे क्रूज में बाढ़ आ गई और सब तितर-बितर हो गए। किसी तरह उसके पापा उसे मिले और उसने हाथ पकड़ लिया।
वहीं, उसकी मां और भाई अभी तक नहीं मिले हैं। उसके नानू तो मिल गए, लेकिन नानी की डेड बॉडी मिली है। यह बच्ची की जुबान से निकले शब्द थे जो उस रात की भयावहता को बयां करते हैं।

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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