भोपाल। लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर जूनियर डॉक्टरों की सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल हैं। इस कारण गांधी मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में पीपीटीसीटी काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर, फर्टिलिटी क्लिनिक, एएनसी रूम सुमित अन्य व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। सीनियर डॉक्टर के साथ जूनियर डॉक्टर यहां की रिस्पांसिबिलिटी संभालते हैं।
जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर होने के कारण मरीज को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वह सुबह से अपनी बारी के इंतजार में बैठे हैं। मरीज अनवर ने बताया कि वह सुबह से काफी परेशान हैं। पैरों में दर्द है और अन्य बीमारियों के कारण सुबह से इलाज के लिए भटक रहे हैं। वे आगे बोल पाते तब तक गार्ड ने रोक दिया। उधर, जूडा ने साफ कर दिया है कि उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। जूडा जबलपुर के प्रेसिडेंट डॉ. शुभम शर्मा आज दोपहर मंत्री शुक्ल से मिलेंगे।
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टर लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर अपना विरोध जता रहे हैं। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तब तक वे ओपीडी में सेवाएं नहीं देंगे।
JDA ने यह भी साफ किया कि ऑपरेशन थिएटर (OT) में भी सिर्फ अति गंभीर मरीज होने पर ही सेवा देंगे। यानी प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन टल सकते हैं। इसका सीधा असर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ेगा।
अप्रैल 2025 से मिलना था नया स्टाइपेंड, अब तक पेंडिंग
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के अनुसार, सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन शासन के आदेश के अनुसार एक अप्रैल 2025 से लागू होना था। यह अब तक लागू नहीं किया है। कई बार निवेदन के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। इससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
