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सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे कांग्रेस का हिंदू चेहरा बन रहे कमलनाथ…?

भोपाल। माथे पर त्रिपुण्ड और हनुमान भक्त कहलवाने वाले कमलनाथ क्या कांग्रेस का हिंदू चेहरा बन गए हैं? ये सवाल राजनीतिक गलियारों में गूंजने लगा है। हालांकि कांग्रेस का ही एक खेमा इसका दबी जुबान में विरोध भी कर रहा है, लेकिन प्रदेश में इससे कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है। कमलनाथ बीजेपी के हिंदू राष्ट्र पर कहते हैं कि भारत में अस्सी प्रतिशत हिंदी रहते हैं, ये वैसे ही हिंदू राष्ट्र है। धर्म हमारा सनातन है। 

मध्य प्रदेश में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले है. इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां हर तरीका अपना रही है. एक तरफ जहां फिलहाल सत्ता में बैठी बीजेपी दनादन सरकारी योजनाओं की घोषणा कर जनता के दिलों में अपनी जगह बनाने में लगी है। तो वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के सरकारी योजनाओं का भी काट निकालने में लगी हैं और हिंदुत्व पर भी भारतीय जनता पार्टी को बढ़त लेने का कोई मौका भी नहीं देना चाहती है। अब कमलनाथ कांग्रेस का हिंदू चेहरा बनते जा रहे हैं? विधानसभा चुनाव के लिए एक रणनीति यह भी है?

बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री हों या पंडित प्रदीप मिश्रा, कमलनाथ उनकी कथा करवा रहे हैं।

असल में बागेश्वर धाम कई बार हिंदू राष्ट्र, सनातनी धर्म, देश में रहने वाले लोग सनातनी हैं जैसे बयान देते रहे हैं. इन बयानों के कारण ही बाबा बागेश्वर को बीजेपी के हिंदुत्व से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में उनके कथा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का परिवार सहित पहुंचना और बागेश्वर का पूर्व सीएम का तारीफ करना, एक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि कमलनाथ के कथा में जाने और हिंदुत्व को लेकर इतने बड़े बयान एक और चर्चा ने जोर पकड़ ली है और वह यह है कि क्या कमलनाथ कांग्रेस की सेक्युलर राजनीति छोड़ धर्म की राजनीति कर रहे हैं।

रणनीति बदल रही है कांग्रेस?

साल 2013 के बाद लगभग 40 विधानसभा और 2 लोकसभा के चुनाव में हार का स्वाद चख चुकी कांग्रेस इन विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव से पहले अपनी रणनीति लगातार बदलने में लगी है. इसी बदलती राजनीति के दौरान ही कांग्रेस कभी सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते जाती है, तो कभी संविधान और सेक्युलरिज्म के रास्ते।

कमलनाथ कोई पहले ऐसे नेता नहीं है जिन्होंने बीजेपी की तरह ही हिंदुत्व की राजनीति कर आगे बढ़ने की कोशिश की हो. भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल ने ‘तपस्वी’ रूप धारण किया था. इस दौरान उनसे किए गए सवालों के जवाब सुनकर भी इस बात की चर्चा तेज होने लगी था कि क्या राहुल इस पूरे यात्रा में दर्शन और सिद्धांत की ही बात करेंगे या राजनीति भी करेंगे।

कांग्रेस के रणनीतिकार आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं? 

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के करारी हार मिलने के बाद सोनिया गांधी ने एके एंटोनी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने उस चुनाव में कांग्रेस के हार का मुख्य कारण उनके मुस्लिम तुष्टिकरण और चुनाव में संगठन के नदारद रहने को बताया।इस रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस ने हिंदुओं के मुद्दे को कभी नहीं उठाया. इस रिपोर्ट में राहुल गांधी की छवि को बदलने पर भी जोर दिया गया।

साल 2017 में गुजरात चुनाव के वक्त कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते आगे भी बढ़ी, लेकिन 2019 के चुनाव में हार के बाद इस पर चर्चा बंद हो गई. 2019 के बाद संजीवनी की आस में कांग्रेस अब फिर से राहुल के चेहरे पर फोकस कर रही है और तपस्वी के सहारे सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर आगे बढ़ रही है. 

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