हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे गीत रचे गए, जिन्होंने दशकों बाद भी अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी है। इन्हीं कालजयी गीतों में फिल्म ‘आन मिलो सजना’ का मशहूर गाना ‘अच्छा तो हम चलते हैं’ भी शामिल है। अपनी मधुर धुन, भावपूर्ण बोल और यादगार गायकी के कारण यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है। हालांकि, इस गीत को लेकर एक दिलचस्प किस्सा भी वर्षों से सुनाया जाता है कि इसकी शुरुआत महज चार साधारण शब्दों से हुई थी और पूरा गीत करीब 25 मिनट में तैयार हो गया था।
1971 की सुपरहिट फिल्म का यादगार गीत
साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म ‘आन मिलो सजना’ में सुपरस्टार राजेश खन्ना और आशा पारेख की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। फिल्म के इस लोकप्रिय गीत को किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज दी, जबकि इसके बोल मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे। संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इसकी धुन तैयार की, जिसने इस गीत को हिंदी फिल्म संगीत की अमर धरोहर बना दिया।
कैसे जन्मीं गीत की पहली पंक्तियां?
फिल्मी दुनिया में लंबे समय से प्रचलित एक किस्से के अनुसार, आनंद बख्शी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल इस गीत के लिए उपयुक्त शब्द तलाशने में काफी समय लगा चुके थे। पूरे दिन विचार-विमर्श के बावजूद कोई ऐसी पंक्ति नहीं बन पा रही थी, जो धुन के साथ पूरी तरह मेल खाए।
इसी दौरान बातचीत खत्म करते हुए लक्ष्मीकांत ने सहज अंदाज में कहा, “अच्छा तो हम चलते हैं।” इस पर आनंद बख्शी ने तुरंत जवाब दिया, “फिर कब मिलोगे?” सामने से उत्तर आया, “जब तुम कहोगे।” कहा जाता है कि यही सामान्य बातचीत गीत की शुरुआती पंक्तियां बन गई और यहीं से पूरी रचना का जन्म हुआ।
महज 25 मिनट में तैयार हो गया पूरा गीत
लोकप्रिय किस्सों के मुताबिक, शुरुआती पंक्तियां मिलते ही आनंद बख्शी को गीत का पूरा स्वरूप सूझ गया। उन्होंने तुरंत काम शुरू किया और करीब 25 मिनट के भीतर पूरे गीत के बोल तैयार कर दिए। यही वजह है कि इस गीत को अक्सर रचनात्मकता और सहज प्रेरणा का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।
किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज ने बनाया अमर
जब गीत की रिकॉर्डिंग हुई तो किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई गायकी ने इसे नई ऊंचाई दे दी। वहीं, पर्दे पर राजेश खन्ना और आशा पारेख की शानदार प्रस्तुति ने गीत को और भी यादगार बना दिया। प्रेम, बिछड़ने की कसक और दोबारा मिलने की उम्मीद को बेहद सरल शब्दों में व्यक्त करने वाला यह गीत आज भी श्रोताओं के दिलों को छूता है।
पांच दशक बाद भी बरकरार है लोकप्रियता
रिलीज के 50 से अधिक वर्षों बाद भी ‘अच्छा तो हम चलते हैं’ रेडियो, संगीत कार्यक्रमों, पारिवारिक आयोजनों और शादी समारोहों में बराबर सुना जाता है। इसकी सादगी, मधुर धुन और भावनात्मक प्रस्तुति इसे हर पीढ़ी के श्रोताओं से जोड़ती है।
‘अच्छा तो हम चलते हैं’ की दिलचस्प कहानी: सिर्फ चार शब्दों से शुरू हुआ था बॉलीवुड का यह सदाबहार गीत, 25 मिनट में हो गया था तैयार
