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प्रदेश के आईएएस अफसरों पर कोर्ट की वक्र दृष्टि… मुख्य सचिव विपक्ष के भी निशाने पर

भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों के लिए बीता सप्ताह कुछ अच्छा नहीं कहा जा सकता। इस सप्ताह कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मुख्य सचिव सहित तीन IAS अधिकारियों को अदालत ने कटघरे में खड़ा किया। 

इसमें सबसे चर्चित मामला चीफ सेक्रेटरी इकबाल सिंह बैंस से जुड़ा था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भोपाल के एक मामले में उनकी अनदेखी व लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। इस मामले में कांग्रेस अब चुनावी मौसम में इकबाल के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठा सकती है। खास बात ये रही कि इस मामले से जुड़े सरकारी वकील ने इस्तीफा ही दे दिया।

मुख्य सचिव बैंस वर्तमान में एक्सटेंशन पर हैं और कांग्रेस में भी उनके खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। ऊनी बेटे भी बैतूल कलेक्टर हैं। यानी पिता पुत्र दोनो ही।महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं। एसपी विपक्ष के निशाने पर रहेंगे ही। अभी तो इनके कथित मकान का मामला नही उठा है। बताते हैं कि बड़े तालाब के डूब क्षेत्र में जमीन को तरीके से घेरा गया। कई लोगो को आस पास से हटवाया गया। एक प्रोजेक्ट ला कर वैध करवा लिया गया। तलाश करने वाले जुट गए हैं।

विपक्ष की बात करें तो पहले नेता प्रतिपक्ष डा गोविंद सिंह ने सीएम को चिट्ठी लिख कर सीएस को हटाने की बात कही थी। इसके बाद राज्यसभा सदस्य विवेक तनख़ा ने सीएस बैंस को हटाने की मांग उठाई। 

शीलेंद्र सिंह और अमर बहादुर

दूसरा मामला IAS शीलेंद्र सिंह से जुड़ा है, जब वे छतरपुर कलेक्टर थे। इसमें तत्कालीन पंचायत सीईओ IAS अधिकारी अमर बहादुर सिंह भी शामिल है। प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार दो IAS अधिकारियों को जेल की सजा सुनाई। वह तो भला हो डबल बेंच का कि इसे स्टे कर दिया, वरना प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में नई घटना दर्ज हो जाती।

शीलेंद्र सिंह पहली बार कटघरे में नहीं आए। वे पहले भी कई बार अदालत से लगाकर कई मामलों में चर्चा में रहे हैं। बताया गया कि जब वे छिंदवाड़ा में एसडीओ थे, तब भी अदालत के एक मामले में फंस गए थे। बताया गया है कि एक मामले में हाईकोर्ट ने कोई आदेश दिया, जिस पर शीलेंद्र सिंह ने अपने रीडर को टिप लिखकर दी कि

‘परीक्षण कर प्रस्तुत करें।’ उनकी इस टीप पर वकील ने उसकी फोटो कॉपी करवाकर हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दी। इससे मामला बिगड़ गया। क्योंकि, जब हाईकोर्ट ने किसी / मामले में निर्णय दे दिया, तो उस पर परीक्षण की क्या जरूरत पड़ गई?

हाईकोर्ट ने शीलेंद्र सिंह की पेशी कर दी। ऐसा बताया जाता है कि उस समय उनके जबलपुर के एक अधिकारी ने सलाह पर यह कहना पड़ा था कि उन्हें इंग्लिश का प्रॉपर ज्ञान नहीं होने से वे आदेश को समझ नहीं पाए थे, इसलिए गलती से वह टिप लिख दी थी। इससे वे कोर्ट से बच गए थे। इसके अलावा जब वे छतरपुर में कलेक्टर थे, तब सत्तारूढ़ पार्टी के एमएलए उनके खिलाफ उनके बंगले के बाहर धरने पर बैठ गए थे। तब प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने बीच में पड़कर मामले को सुलझाया था।

 IAS प्रतिभा पाल हाई कोर्ट में तलब

प्रदेश की एक और आईएएस अधिकारी को भी अवमानना के मामले में हाईकोर्ट ने तलब किया है। बताया गया कि जबलपुर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय द्विवेदी की सिंगल बेंच ने रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल को 22 अगस्त को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए। मामला रीवा के बसामन मामा मंदिर के आसपास की जमीन से जुड़ा है। कोर्ट ने इस जमीन पर किसी भी निर्माण या जीर्णोद्धार पर प्रतिबंध लगाया था।

रीवा के जिला न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए निर्माण का काम जारी है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने रीवा कलेक्टर और एसडीएम भारती मेरावी को व्यक्तिगत हाजिरी के लिए तलब कर लिया। नोटिस में हाईकोर्ट ने पूछा है कि व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर न्यायालय को बताएं कि अवमानना के कृत्य पर उन्हें दंडित क्यों नहीं किया जाए। अब देखना है कि उन्हें भी सजा मिलेगी या माफी!

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