Vedanta vs Adani : अडानी के पक्ष में बनाए गए थे नियम… वेदांता ने जेपी एसोसिएट्स के CoC पर उठाए सवाल

मुंबई। बीते कुछ समय से दिवालिया कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण को लेकर देश के दो बड़े अरबपति अनिल अग्रवाल और गौतम अडानी आमने-सामने हैं। अनिल अग्रवाल के अगुवाई वाले वेदांता समूह ने अब जयप्रकाश एसोसिएट्स के कर्जदाताओं द्वारा अपनाए गए बोली मूल्यांकन मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। वेदांता का आरोप है कि ये मापदंड अडानी समूह के पक्ष में खास तौर पर तैयार किए गए थे। बता दें कि कर्जदाताओं ने जेपी समूह की कर्ज में डूबी कंपनी के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की कम मूल्य वाली बोली को चुना था।

दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी में सुनवाई के दौरान वेदांता लिमिटेड के वकील ने कहा- वेदांता से बेहतर ऑफर किसी ने नहीं दिया। ऐसा लगता है कि CoC (कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स) ने इसे किसी एक व्यक्ति के लिए ही खास तौर पर तैयार किया है। कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स यानी कर्जदाताओं की समिति ने व्यावसायिक बुद्धिमत्ता को खत्म करने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजीत सिन्हा ने मूल्यांकन मानकों की ओर इशारा करते हुए पूछा कि क्या इसका उपयोग मूल्य को अधिकतम करने के लिए किया गया था या किसी अन्य उद्देश्य के लिए।

उन्होंने दलील दी कि वेदांता की बोली अडानी समूह की तुलना में कुल मूल्य में 3,400 करोड़ रुपये अधिक थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीओसी की बैठक में कम बोली चुनने पर कोई चर्चा नहीं हुई। वेदांता के वकील ने कहा कि मूल्यांकन मानकों के अनुसार 35 अंकों में से अडानी को 29.30 और वेदांता को 18.51 अंक दिए गए।उन्होंने बताया कि शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) के मामले में वेदांता को 35 में से 35 अंक मिले थे लेकिन 180 दिनों के भीतर व्यापार संचालन में सुधार के लिए कैपिटल डालने जैसे अन्य कारकों में उन्हें कम अंक दिए गए। वकील ने पूरी प्रक्रिया में अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।

क्या है मामला?
दरअसल, एनसीएलएटी उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें वेदांता ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए सफल समाधान आवेदक के रूप में अडानी एंटरप्राइजेज के चयन को चुनौती दी है।

बता दें कि 24 मार्च को एनसीएलएटी ने अडानी समूह द्वारा जेपी ग्रुप की कंपनी के अधिग्रहण के लिए दी गई 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ वेदांता की याचिका पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, यह भी कहा गया था कि समाधान योजना का भविष्य वेदांता की अपील के परिणाम पर निर्भर करेगा।

वेदांता की 17000 करोड़ रुपये की बोली
इलाहाबाद स्थित एनसीएलटी पीठ ने 17 मार्च को अडानी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी। अडनी को कर्जदाताओं से अधिकतम 89 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि डालमिया सीमेंट (भारत) और वेदांता समूह पीछे रह गए थे। वेदांता ने जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए करीब 17,000 करोड़ रुपये की बोली लगायी थी।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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