STT चार्ज बढ़ा, अब निफ्टी फ्यूचर्स में ट्रेड पड़ेगा महंगा, बढ़ जाएगी 1 लॉट की कीमत

नई दिल्ली। शेयर बाजार में टैक्स नीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. जेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे न केवल ट्रेडिंग गतिविधि घट रही है, बल्कि सरकार के टैक्स कलेक्शन को भी नुकसान हो रहा है. उनका मानना है कि ज्यादा टैक्स लगाने से बाजार की भागीदारी धीरे-धीरे कम होती है, जिसका असर लंबे समय में साफ दिखने लगता है.
नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि एसटीटी उस दौर में लागू किया गया था, जब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) को खत्म कर दिया गया था. उस समय एसटीटी को टैक्स बैलेंस करने के विकल्प के तौर पर देखा गया. लेकिन बाद में एलटीसीजी दोबारा लागू हो गया, इसके बावजूद हर बजट में एसटीटी बढ़ाया जाता रहा. कामथ का कहना है कि एक बाजार सहभागी के तौर पर उन्हें हर साल उम्मीद रहती है कि बजट में एसटीटी घटेगा, लेकिन हकीकत इसके उलट होती रही है.
बजट 2024 में F&O पर बड़ी बढ़ोतरी
कामथ ने बजट 2024 का खास तौर पर जिक्र किया, जब फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रेड पर एसटीटी में करीब 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई थी. उस समय फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.0125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.02 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि ऑप्शंस पर टैक्स 0.0625 प्रतिशत से बढ़कर 0.1 प्रतिशत हो गया. उन्होंने बताया कि उस वक्त बाजार तेजी में था, इसलिए टैक्स बढ़ने का असर तुरंत नजर नहीं आया और ट्रेडिंग वॉल्यूम बना रहा.
बाजार ठंडा पड़ते ही दिखने लगा असर
नितिन कामथ के अनुसार, समस्या तब सामने आती है जब बाजार में तेजी नहीं रहती. पिछले एक साल में जैसे-जैसे बाजार की रफ्तार धीमी हुई, वैसे-वैसे ज्यादा एसटीटी का असर भी दिखने लगा. ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट आने लगी और कई छोटे व मिड-लेवल ट्रेडर्स की भागीदारी कम हो गई. उनका कहना है कि बुल मार्केट में ऊंचा टैक्स सहन किया जा सकता है, लेकिन हर बाजार हमेशा तेजी में नहीं रहता.
एसटीटी कलेक्शन लक्ष्य से काफी पीछे
कामथ ने वित्त वर्ष 2025-26 के एसटीटी कलेक्शन पर भी सवाल उठाए. सरकार ने इस साल एसटीटी से करीब 78,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था. हालांकि 11 जनवरी तक सिर्फ लगभग 45,000 करोड़ रुपये ही जुट पाए थे. अगर मार्च के अंत तक 12,000 करोड़ रुपये और भी वसूल हो जाते हैं, तब भी कुल कलेक्शन करीब 57,000 करोड़ रुपये ही रहेगा, जो लक्ष्य से लगभग 25 प्रतिशत कम है. कामथ का मानना है कि अगर 2024 में एसटीटी नहीं बढ़ाया गया होता, तो कम टैक्स के बावजूद सरकार को कुल मिलाकर ज्यादा राजस्व मिल सकता था. नितिन कामथ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब बजट से पहले टैक्स स्ट्रक्चर और बाजार सुधारों पर चर्चा तेज है. उनका संदेश साफ है कि टैक्स दरें बढ़ाने से तुरंत फायदा दिख सकता है, लेकिन लंबे समय में यह ट्रेडिंग, निवेश और सरकारी कमाई तीनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.





