Sahara-adani Property Deal : 1 लाख करोड़ में हो सकता है सौदा, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली. सहारा समूह की कंपनी सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन अडानी प्रॉपर्टीज को अपनी 88 संपत्तियां बेचने की योजना बना रहा है. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है. इस डील से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल सहारा अपने पुराने बकायों और निवेशकों का पैसा लौटाने में करेगा. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सहारा समूह की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि सहारा और अडानी समूह के बीच एक टर्म शीट पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. इस दस्तावेज़ को अदालत में सीलबंद लिफाफे में सौंपा गया है. सिब्बल ने कहा कि यह सौदा सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ेगा, और इससे मिलने वाली रकम सहारा के बकायों से कहीं ज़्यादा होगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन हफ्ते में सरकार से रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सहारा और अडानी प्रॉपर्टीज के बीच यह सौदा एक लाख करोड़ रुपये में हो सकता है. यह रकम सहारा समूह पर निवेशकों के बकाए से काफी ज्यादा है. दरअसल, सहारा समूह पर निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये लौटाने का दबाव है. सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में आदेश दिया था कि सहारा अपनी दो कंपनियों सहारा हाउसिंग और सहारा रियल एस्टेट के जरिए जुटाई गई रकम को सेबी-सहारा खाते (SEBI-Sahara Account) में जमा करे. कुल मिलाकर यह रकम करीब 25,000 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब तक सहारा को लगभग 9,481 करोड़ रुपये और जमा करने हैं. ऐसे में यह सौदा सहारा के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
अडानी समूह की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि समूह इन सभी 88 संपत्तियों को एकमुश्त (en bloc) खरीदने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा कि सौदे से जुड़ी रकम की जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन यह डील तभी आगे बढ़ेगी जब सुप्रीम कोर्ट इसकी अनुमति देगा. सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार सेबी-सहारा खाते से निवेशकों के पैसे की वापसी की प्रक्रिया पहले से चला रही है. इसलिए सहारा और अडानी के बीच यह डील सरकार की जांच के बाद ही आगे बढ़नी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि वित्त मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय को इस मामले में पक्षकार (party) बनाया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस सुझाव को मंज़ूरी दे दी.
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के दोनों मंत्रालयों, सेबी (SEBI) और कोर्ट मित्र शेखर नफाडे से कहा है कि वे तीन हफ्तों के भीतर इस सौदे पर अपनी रिपोर्ट और राय पेश करें. कोर्ट ने नफाडे को यह भी कहा कि वे सहारा की सभी संपत्तियों का विवरण तैयार करें, ताकि यह पता चल सके कि किन संपत्तियों पर पहले से तीसरे पक्ष (third party) का अधिकार या दावेदारी है. सिब्बल ने बताया कि सहारा समूह को अपनी कुछ संपत्तियों की पूरी जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्हें पहले कुछ कर्मचारियों ने अलग-अलग तरीके से मैनेज किया था. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को तय की है.





