मुंबई. माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड के कारोबार को लेकर एक नई खबर है। दरअसल, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच ने वेदांता की सब्सिडयरी कंपनियों से जुड़ी एक स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी दे दी है। बता दें कि वेदांता की सब्सिडयरी कंपनियों में तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL), वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड, माल्को एनर्जी लिमिटेड, वेदांता बेस मेटल्स लिमिटेड और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड शामिल हैं।
ट्रिब्यूनल में दायर तर्क के अनुसार, वेदांता लिमिटेड ने कहा कि पावर बिजनेस में रिस्क और कॉम्पिटिशन का नेचर वेदांता के दूसरे नेचुरल रिसोर्स वर्टिकल्स से अलग है, जिसके लिए एक अलग एंटिटी की जरूरत है ताकि फोकस्ड और बेहतर कैपिटल मार्केट एक्सेस मिल सके। NCLT ने ऑपरेशनल कंटिन्यूटी पर भी ध्यान देते हुए निर्देश दिया कि मर्चेंट पावर अंडरटेकिंग में काम करने वाले सभी कर्मचारी बिना किसी रुकावट या ब्रेक के TSPL के कर्मचारी बन जाएंगे और उनकी मौजूदा नौकरी से कम फायदेमंद शर्तों पर नहीं। इस रीस्ट्रक्चरिंग से बनने वाली नई कंपनी के फाइनेंशियल प्रोफाइल में काफी बदलाव आने वाला है।
इंडिपेंडेंट ऑडिटर के सर्टिफिकेट का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल के ऑर्डर में बताया गया है कि तलवंडी साबो पावर की नेटवर्थ डीमर्जर से पहले 3,606 करोड़ रुपये से बढ़कर डीमर्जर के बाद 8,207 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसके उलट, एसेट्स के ट्रांसफर के बाद वेदांता लिमिटेड की नेटवर्थ 46,533 करोड़ रुपये से घटकर 43,230 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। ऑर्डर इस बात की पुष्टि करता है कि मर्चेंट पावर अंडरटेकिंग के डीमर्जर के लिए शेयर एंटाइटलमेंट रेश्यो 1:1 ही रहेगा। TSPL की शेयर कैपिटल को डीमर्ज्ड कंपनी की शेयरहोल्डिंग के हिसाब से बदला जाएगा, जिससे यह पक्का होगा कि मौजूदा वेदांता शेयरहोल्डर्स नई कंपनी में अपना आनुपातिक हिस्सा बनाए रखें। वेदांता के शेयर की बात करें तो शुक्रवार को 609.90 रुपये पर बंद हुआ। एक दिन पहले के मुकाबले शेयर में 1.05% बढ़त दर्ज की गई।
