Beema : बीमा क्षेत्र में धोखाधड़ी के कारण हर साल हो रहा ₹30401 करोड़ का नुकसान

भारत का बीमा उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन साथ ही एक गंभीर चुनौती भी बढ़ रही है- वह है बीमा धोखाधड़ी। यह समस्या न केवल कंपनियों को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है, बल्कि ईमानदार ग्राहकों को बढ़ी हुई प्रीमियम दरें चुकाने के लिए भी मजबूर कर रही हैं। बीमा क्षेत्र में धोखाधड़ी के बहुत अधिक मामले सामने आ रहे हैं। आश्चर्यजनक रूप से, भारत में सभी बीमा धोखाधड़ी में 86% जीवन बीमा क्षेत्र से जुड़ा है। यह गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में होने वाली धोखाधड़ी से लगभग छह गुना अधिक है। अलग-अलग तरह की जालसाजी के कारण बीमा उद्योग को हर साल 30,401 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इसका मतलब है कि कंपनियां अपने कुल राजस्व का 8.5% धोखाधड़ी के कारण गंवा देती हैं।
भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के मार्केटिंग प्रमुख नितिन मेहता के अनुसार बीमा धोखाधड़ी तब होती है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर या झूठ बोलकर कोई ऐसा लाभ या फायदा हासिल करता है, जिसका वह हकदार नहीं है। जैसे-जैसे डिजिटलीकरण तेज हो रहा है और लोग रिमोट जगहों से काम करने को तरजीह दे रहे हैं। लेकिन इस परिस्थिति में धोखेबाज कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए तत्पर रहते हैं।

कैसे की जाती है बीमा धोखाधड़ी?
बीमा धोखाधड़ी तब होती है जब आवेदक अधिक अनुकूल पॉलिसी शर्तें, कवरेज या प्रीमियम प्राप्त करने के लिए बीमा आवेदन पत्रों पर गलत या अधूरी जानकारी देते हैं। आमतौर पर गलत जानकारी देकर पहले से मौजूद चिकित्सा स्थितियों को छिपाना, आय या रोजगार विवरण और उम्र को गलत बताना, या तंबाकू/शराब/ड्रग्स के सेवन जैसी महत्वपूर्ण व्यक्तिगत इतिहास/आदतों को छिपाना शामिल है। व्यक्ति अपने लाभार्थियों को जीवन बीमा लाभ प्राप्त करने की अनुमति देने के लिए अपनी मृत्यु का नाटक करता है। मृत्यु का नाटक करने में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर भी बीमा धोखाधड़ी की जाती है। कभी-कभी जालसाज ग्राहकों को नकली बीमा पॉलिसी भी बेच देते हैं। उनसे बिना किसी कवरेज के भी प्रीमियम वसूला जाता है। पीड़ितों को जब धोखे का एहसास होता है पता चलता है कि उसके पास कोई वैध पॉलिसी नहीं है।

बीमा धोखाधड़ी से कैसे सुरक्षित रहें?
बीमा कंपनी से होने का दावा करने वाले अनचाहे ईमेल, फ़ोन कॉल या टेक्स्ट संदेशों से सावधान रहें। कोई भी व्यक्तिगत जानकारी देने से पहले प्रेषक की पहचान सत्यापित करें। बीमा एजेंट या ब्रोकर द्वारा दी गई जानकारी को हमेशा दोबारा जांचें, खासकर अगर वह सच होने से बहुत ज्यादा अच्छी लगती हो। किसी भी विवरण की पुष्टि के लिए सीधे अपनी बीमा कंपनी से संपर्क करें। यदि आपको कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आती है या धोखाधड़ी वाला संचार प्राप्त होता है, तो इसकी रिपोर्ट तुरंत अपनी बीमा कंपनी और संबंधित प्राधिकारियों को करें। मजबूत, यूनिक पासवर्ड का उपयोग करके, संवेदनशील विवरणों को ऑनलाइन साझा करने से बचें, और सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के बारे में सतर्क रहकर अपनी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखें।
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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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