देश में सर्वाइकल कैंसर की बढ़ती रफ्तार ने केंद्र और राज्य सरकारों की चिंता बढ़ाई

नई दिल्ली। देश में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की बढ़ती रफ्तार ने केंद्र और राज्य सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। राज्यसभा में सांसद राजिंदर गुप्ता के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पेश की गई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु इस बीमारी के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं । मध्य प्रदेश की स्थिति भी डराने वाली है, जहाँ यह बीमारी टॉप राज्यों की सूची में शामिल है ।

सर्वाइकल कैंसर का गढ़ बना यूपी उत्तर प्रदेश देश में इस बीमारी का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जबकि मध्य प्रदेश मौतों और केसों के मामले में देश में छठे स्थान पर है।
मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में सर्वाइकल कैंसर न केवल स्थिर रहा है, बल्कि इसमें मामूली बढ़ोत्तरी भी दर्ज की गई है। मप्र में हर साल 4 हजार से ज्यादा सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। करीब 21 सौ महिलाएं हर साल इसकी जद में आकर जान गवां रहीं हैं।
सरकार ने बीमारी की जल्द पहचान के लिए ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ और जिला अस्पतालों में स्क्रीनिंग तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश में चालू वित्त वर्ष 2025-26 (17 फरवरी तक) में रिकॉर्ड 96.28 लाख महिलाओं की जांच की गई । मध्य प्रदेश में इसी अवधि में 11.96 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है । अब तक देश की 8.73 करोड़ महिलाओं की जांच की जा चुकी है ।
अब 14 साल की बालिकाओं को लग रही एचपीवी वैक्सीन

केंद्र सरकार ने 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए मुफ्त एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया है । इसके लिए स्वदेशी टीके ‘सर्वावैक’ के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है ।
एमपी के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों (बुधनी, छतरपुर, दमोह) में कैंसर के इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती को प्राथमिकता दी जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर न काटने पड़ें।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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