Dance से जुडा एक वाकया…

आज कहीं डांस की चर्चा पर इन्दिरा गांधी से जुड़ा एक वाकया आया, जो कभी बड़ा चर्चित हुआ था, जब वह प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार अमेरिकी दौरे पर मार्च 1966 में गई थीं। इंदर मल्होत्रा ने इन्दिरा जी की पर्सनल एवं पोलिटिकल बायग्राफी की किताब में उस पर लिखा है कि  यात्रा में इन्दिराजी  के सम्मान में राष्ट्रपति जानसन ने व्हाइट हाउस में एक रात्रि भोज दिया था। वहां प्रेसिडेंट जानसन ने उनको डांस फ्लोर पर नृत्य के लिये आमंत्रित किया था। यह सुनते ही इन्दिरा गांधी की भौंहें थोड़ा तनीं और दो टूक अंदाज में जबाब देते हुये नृत्य से मना कर दिया। ऐसा नहीं था कि उनको वेस्टर्न डांस आता नहीं था, पर वह मानती थीं यहां वह भारत के लोगों की प्रतिनिधि हैं और भारत के लोग इसे पसन्द नहीं करेंगे कि उनकी प्रधान मंत्री डांस फ्लोर पर डांस करें।

  वही इन्दिरा गांधी चार वर्ष बाद संयुक्त राष्ट्र के 25 वें सम्मेलन में भी अमेरिका गईं, जहां अनेक राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे थे। वहां यह अखबारों से पता चला कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सभी राष्ट्राध्यक्षों को व्हाइट हाउस में रात्रि भोज पर बुलाया है। नटवर सिंह ने अपनी किताब हार्ट टू हार्ट में लिखा है कि अमेरिका में भारत के राजदूत लक्ष्मी कांत झा वाशिंगटन से न्यूयॉर्क आये, प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी से पूछा कि वह भोज में शामिल होने वाशिंगटन कब आयेंगी? इन्दिरा गांधी ने कहा कि उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया गया है, तो वह नहीं आयेंगी। झा ने समझाने की कोशिश की कि सभी पहुंच रहे हैं, तो आपके न आने से गलत संदेश जायेगा। इन्दिरा जी ने दो टूक कहा कि प्रेसिडेंट निक्सन यदि चाहते, तो उन्हें नई दिल्ली में अपने राजदूत के मार्फत निमंत्रण दे सकते थे, पर  ऐसा नहीं किया, तो मेरे जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। समझाये जाने एवं अन्य राष्ट्राध्यक्षों के वहां जाने के बावजूद सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के स्वाभिमान को ध्यान में रख कर वह निक्सन के भोज में न जाने के अपने फैसले पर अविचल रहीं।

उल्लेखनीय है कि उन्हीं प्रेसिडेंट निक्सन के साथ मई 1971 में बातचीत को बीच में ही ब्रेक कर और संयुक्त पत्रकार वार्ता कवरेज को तैयार प्रेस को बायकाट पीएम इन्दिरा जी व्हाइट हाउस से निकल आईं, जब अमेरिकी प्रेसिडेंट ने पाकिस्तान का पक्ष लेते हुये कुछ धौंस के संग बातचीत आगे बढ़ाने का प्रयास किया। कार के पास दौड़ पहुंचे विदेश मंत्री किसिंजर को भी इन्दिरा गांधी ने झाड़ लगाते हुये दो टूक जबाब दिये। भारत लौट कर पहला काम किया कि पूर्वी पाकिस्तान शरणार्थियों के मुद्दे पर भारत से प्रायः सैकड़ों देशों में प्रतिनिधि भेज कर भारत के स्टैंड के प्रति वैश्विक समर्थन जुटाने की बड़ी सार्थक पहल की। उसके बाद नौ अगस्त को भारत सोवियत संधि पर हस्ताक्षर कर 1971 की पाकिस्तान पर ऐतिहासिक विजय की सफलता की पटकथा की नींव डाल दी।

राजनयिक या कूटनीतिक रिश्तों के बीच इन्दिरा गांधी के मिजाज से जुड़ी 1966 दौरे की ही एक और बानगी है कि अमेरिका में भारत के तब के राजदूत बीके नेहरू को प्रेसिडेंट जॉनसन के  निकट सहयोगी जैक वेलेन्टी का फ़ोन आया कि लाइफ़ पत्रिका में छपा है कि इंदिरा गांधी को पसंद नहीं है कि उन्हें ‘मैडम प्राइम मिनिस्टर’ संबोधित जाय। अपनी आत्मकथा ‘नाइस गाइज़ फ़िनिश सेकेंड’ में वीके नेहरू ने लिखा है कि उन्होंने पूछा था कि तो हमारे प्रेसिडेंट उन्हें क्या कह कर संबोधित करें ? इस पर नेहरू ने इन्दिरा जी से बात की तो खूब हंसते हुये बोलीं वो मुझे सीधे प्रधानमंत्री कहकर बुला सकते हैं। ‘मिस्टर प्राइम मिनिस्टर’ कहें तो भी चलेगा। ठहाके संग यहां तक कहा कि उनसे कह दीजियेगा, मेरे मंत्रिमंडल के कुछ साथी तो मुझे ‘सर’ भी कहते हैं।

सतीश कुमार की वाल से साभार…

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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