आखिरी समय में अमेरिका ने भारत में इस महीने यानि दिसंबर में होने वाले इंटरव्यू अगले साल मार्च-अप्रैल तक टाल दिए हैं। इससे कई वीजाधारकों की अमेरिका वापसी अटक गई है। इमिग्रेशन वकीलों ने एच-1बी वीजा होल्डर्स को सलाह दी है कि वे भारत की यात्रा ना करें। एक्सपर्ट का कहना है कि एच-1बी वीजा होल्डर्स के यात्रा करने से उनकी नौकरी खतरे में आ सकती है। ऐसे में उनको बहुत एहतियात से कदम उठाने की जरूरत है।
असल में, अमेरिका के एच-1बी वीजा होल्डर भारतीयों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन लगातार कोई न कोई ऐसा आदेश जारी कर देता है, जिससे उनकी चिंता बढ़ जाती है। एक रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर में होने वाले वीजा इंटरव्यू टलने के चलते सैकड़ों भारतीय एच-1बी वीजाधारक मुश्किल में आ गये हैं। एक रिपोर्ट में इमिग्रेशन विशेषज्ञ राहुल रेड्डी ने चेताया है कि फिलहाल भारत की यात्रा करने वाले एच-1बी कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ सकती है और वे अपने परिवारों से बिछड़ सकते हैं। ऐसे में जब तक आपके पासपोर्ट पर वैध वीजा ना हो तब तक वीजा स्टैंपिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा ना करें।
अमेरिकी इमिग्रेशन फर्म रेड्डी न्यूमैन ब्राउन पीसी के संस्थापक पार्टनर राहुल रेड्डी के मुताबिक, नियोक्ता छह महीने एच-1बी पद खाली नहीं रख सकते। कई कंपनियां कानूनी लिहाज से अमेरिका के बाहर से काम की कानूनी अनुमति नहीं दे सकतीं। इसका मतलब है कि एच-1बी कर्मचारी अब यात्रा करेगा तो वह अपनी नौकरी पर वापस नहीं बल्कि बेरोजगारी की ओर लौट सकता है।
इमिग्रेशन अटॉर्नी रेबेका चेन का कहना है कि जिन लोगों को अभी तक ईमेल नहीं मिला है, उन्हें भी फिलहाल भारत की यात्रा स्थगित कर देनी चाहिए। जो लोग पहले से ही भारत में हैं और अमेरिका लौटने के लिए वीजा स्टैंपिंग की आवश्यकता रखते हैं, उनके पास अब इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इमिग्रेशन वकीलों के अनुसार, अमेरिका में फिर से प्रवेश करने के लिए वीजा स्टैंप का होना जरूरी है। इसलिए अगर कोई वीजा धारक पहले से ही अमेरिका में है तो उसे वीजा स्टैंपिंग के लिए यात्रा करने से बचना चाहिए। इंटरव्यू के आगे बढऩे से अमेरिका में काम करने वाले कई भारतीयों पर असर पड़ेगा, जो अपने वीजा स्टैंप का नवीनीकरण (रीन्यू) कराना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति उन लोगों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जो अपने परिवार के साथ भारत आना चाहते थे। वीजा प्रक्रिया में अप्रत्याशित देरी ना केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि पेशेवर करियर पर भी असर डाल सकती है। कई लोगों के सामने इस घटनाक्रम से नौकरी खोने का डर बढ़ गया है।
देखने में आ रहा है कि लगातार ट्रंप प्रशासन के निशाने पर सबसे ज्यादा भारतीय ही आ रहे हैं। इसके पीछे बड़ा कारण यह भी है कि अमेरिका में भारतीयों की बड़ी संख्या अच्छे पदों पर है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी भारतीय प्रोफेशनल्स की भरमार है। ट्रंप कई बार संकेत दे चुके हैं कि वो अमेरिका में भारतीयों का कब्जा कम करके रहेंगे। अमेरिका फस्र्ट का नारा भी वह लगातार दे रहे हैं।
माना जा रहा है कि अमेरिका की नई नीतियों और नये आदेशों का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही पड़ रहा है, लेकिन इससे केवल भारतीयों का नुकसान नहीं होगा, अमेरिका का भी होगा। अमेरिका की कंपनियों को सफलता के आसमान तक पहुंचाने में भारतीयों का योगदान ज्यादा रहा है। यदि भारतीयों को रोका जाता है, तो कहीं न कहीं उन कंपनियों पर भी विपरीत असर पडऩा तय है।
Editorial
भारत यात्रा की तो…?
