संपादकीय
यहाँ भी वेट एंड वाच…

संजय सक्सेना
उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय रिजर्व बैंक यानि आरबीआई वैश्विक संकट के दौर में कुछ राहत देगा, लेकिन उसने नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।
दरअसल, आरबीआई अभी रुको और देखो की नीति अपना रहा है। ग्लोबल मार्केट में मची उथल-पुथल को देखते हुए आरबीआई जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता। बैंक अभी दुनिया भर के आर्थिक हालातों पर नजर रखना चाहता है। इसी वजह से ब्याज दर में बदलाव नहीं किया गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद और गति मजबूत बनी हुई है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद लिए गए इस फैसले ने बाजारों को स्थिरता और निरंतरता का स्पष्ट संकेत दिया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया कि वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे निरंतर संघर्षों ने व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण पर दबाव डाला है, जिससे अत्यधिक अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। इन वैश्विक परिस्थितियों और बाहरी दबावों के कारण नीति निर्माताओं के लिए अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने हेतु सतर्कता बरतना जरूरी हो गया है।
गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, समिति ने सर्वसम्मति से नीतिगत ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में वोटिंग की। इसलिए रेपो रेट बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक ने अपना रुख न्यूट्रल रखा है। यह न्यूट्रल रुख दिखाता है कि रिजर्व बैंक बदलती परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में उचित कदम उठाने के लिए तैयार है। वैश्विक अस्थिरताओं के इस दौर में, मौद्रिक नीति समिति यानि एमपीसी ने घरेलू अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक बेहद संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर यह है कि महंगाई दर पूरी तरह से नियंत्रण में बनी हुई है। आरबीआई गवर्नर ने पुष्टि की है कि महंगाई का स्तर सीमित है और यह केंद्रीय बैंक की ओर से निर्धारित चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। महंगाई का इस सुरक्षित दायरे में रहना व्यापार जगत के लिए एक अनुकूल माहौल प्रदान करता है। भले ही वैश्विक परिदृश्य में भारी अनिश्चितताएं मौजूद हों, लेकिन भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत हैं। उच्च-आवृत्ति संकेतक इस बात की स्पष्ट गवाही देते हैं कि देश की आर्थिक गतिविधि में निरंतर गति बरकरार है।
हालांकि आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, महंगाई में फिर से उछाल आने का खतरा अभी टला नहीं है। खराब मौसम और बेमौसम बारिश की वजह से फल, सब्जियों और अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। ईरान-इजरायल जंग की वजह से सप्लाई चैन पर बुरा असर पड़ रहा है।
रिजर्व बैंक गवर्नर भले ही दावा कर रहे हों कि महंगाई सीमित है और अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन जमीनी हकीकत यह कतई नहीं है। केवल एक उदाहरण यह बताने के लिए काफी है, बाजार में खाद्य तेल का 15 किलो के पीपे पर पिछले डेढ़ महीने में आठ सौ रुपए तक की वृद्धि हुई है। गर्मी में खराब होने वाली या एक-दो दिन चलने वाली सब्जियों को छोड़ दें तो सभी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। यही नहीं, बाजार में कुकिंग गैस से बनने वाली वस्तुओं के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। चाय-काफी महंगी हो गई है।
चूंकि सरकार में बैठे लोग सडक़ पर नहीं उतरते और न ही कोई चीज खाते समय या खरीदते समय उसका रेट पूछते हैं, इसलिए उन्हें दाम बढऩे से कोई फर्क नहीं पड़ता। और न ही वो इस पर ध्यान देते हैं। रिजर्व बैंक की सर्वे टीम भी कैसे सर्वे करती है, यह तो वही जाने, लेकिन उसके सर्वे और आंकड़े यथार्थ के करीब तो नहीं होते। आजू-बाजू ही रहते हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष आज कुछ दिन के लिए रुकने की खबर भले ही आ रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था पर तो विपरीत असर पडऩे ही लगा है। और  लोगों को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक कुछ राहत देगा। ऐसा नहीं हुआ, उनकी उम्मीदों पर तो पानी फिर गया है। युद्ध के परिणाम अपने देश में चुनाव के बाद ही समझ आएंगे, जब अचानक कई तरह के टैक्स बढऩे, डीजल-पेट्राल और गैस आदि के दाम बढऩे की पूरी उम्मीद है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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