Editorial
धनतेरस और आसमान पर सोना

संजय सक्सेना

आज धनतेरस है, इस त्यौहार पर सोना-चांदी खरीदना विशेष शुभ माना जाता है। और सोने की बात करें तो इसकी कीमतें इस साल 35 से अधिक बार रिकॉर्ड ऊंचाई को छू चुकी हैं, इसके बाद भी खरीदने की होड़ कम होती नहीं दिख रही है। दीवाली और शादियों के मौसम ने इसे और बढ़ा दिया है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानि कैट और इसके ज्वेलरी विंग ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन यानि एआईजेजीएफ द्वारा धनतेरस के अवसर पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक के सोने चांदी के व्यापार का अनुमान लगाया गया है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, देशों के बीच तनाव और मजबूत एशियाई मांग से विदेशी बाजारों में सोना जल्द 4,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। शुक्रवार को सोना 4,340 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह तेज साप्ताहिक बढ़त की ओर अग्रसर है, जो मौजूदा नौ सप्ताह की तेजी में सबसे मजबूत है। दिल्ली बाजार में 1.30 लाख रुपये प्रति दस ग्राम के पार है।
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों ने बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित संपत्तियों में निवेश को प्राथमिकता दी है। इस हफ्ते सोने की कीमतों ने बार-बार नई ऊंचाइयों को छुआ। इसकी वजह अमेरिका-चीन के बीच नए व्यापारिक तनाव व अमेरिकी सरकार के मौजूदा बंद को लेकर चिंताएं थीं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन की टिप्पणियों में श्रम बाजार के कमजोर होने के संकेतों की ओर इशारा करने के बाद अमेरिकी व्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से सोने को और ज्यादा तेजी मिली। दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने इस साल के पहले नौ महीनों में 600 टन सोना खरीदा है। ईटीएफ में निवेश व सुरक्षित संपत्तियों की मजबूत मांग के चलते इस साल सोने की कीमतों में 65 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह नया इतिहास बन गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी, देशों के बीच तनाव और मजबूत एशियाई मांग के कारण विदेशी बाजारों में चांदी के भाव 75 डॉलर प्रति औंस तक जा सकते हैं। घरेलू बाजार में यह 1.84 लाख रुपये किलो है। रिटर्न के मामले में सोने से बेहतर प्रदर्शन करने वाली चांदी के मजबूत औद्योगिक खपत और बढ़ते आपूर्ति घाटे के कारण मांग बढ़ी है। पीली धातु की तेजी वैश्विक अनिश्चितता, इस साल के अंत में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से है। लंबी अवधि में अगर डॉलर के मुकाबले रुपया 89 तक जाता है तो फिर सोना 1.35 लाख के पार हो सकता है।
कैट एवं एआईजेजीएफ द्वारा देशभर के सर्राफा बाजारों में किए गए धनतेरस सर्वेक्षण के अनुसार इस वर्ष धनतेरस पर सोने-चांदी के सिक्कों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जबकि स्वर्ण आभूषणों की बिक्री में कुछ गिरावट का अनुमान है। देखा जा रहा है कि सोना-चांदी के रिकॉर्ड ऊंचे दामों के चलते मध्यम और उच्च वर्ग के ग्राहक निवेश के रूप में अब ठोस सिक्कों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर, ज्वैलरी यानि आभूषणों की मांग में कमी दर्ज की जा रही है।
शादियों के लिये होने वाली खरीददारी में भारी आभूषणों की जगह हल्के गहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले वर्ष दीपावली के दौरान सोने का भाव लगभग 80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो इस वर्ष बढक़र 1,30,000 रुपए प्रति 10 ग्राम को पार कर गया है। यानी करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार चांदी की कीमतें 2024 में 98,000 रुपए प्रति किलोग्राम थीं, जो अब 1,80,000 रुपए प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई हैं, यानी लगभग 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बढ़ी हुई कीमतों के चलते निवेशक बड़ी संख्या में सर्राफा बाजार की ओर आकर्षित हुए हैं।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार देशभर में करीब 5 लाख छोटे-बड़े ज्वैलर्स सक्रिय हैं। यदि प्रत्येक ज्वैलर औसतन 50 ग्राम सोना बेचता है, तो कुल मिलाकर लगभग 25 टन सोने की बिक्री होगी, जिसकी मौजूदा भाव से अनुमानित कीमत 32,500 करोड़ रुपए होगी। इसी प्रकार, प्रत्येक ज्वैलर द्वारा औसतन 2 किलो चांदी बेचने पर लगभग 1,000 टन चांदी की बिक्री होगी, जिसकी मौजूदा कीमत 18,000  करोड़ रुपए के आसपास अनुमानित है। इस प्रकार, देशभर के सर्राफा बाजारों में कुल मिलाकर लगभग 50,000 करोड़ से अधिक के व्यापार का अनुमान है।
देखा जाए तो सोने-चांदी के प्रति इंसान का रुझान आज का नहीं है, प्राचीन काल से ही आभूषणों का शौक लोगों को रहा है। सोना विशेष तौर पर महिलाओं की पहली पसंद रहा है, पर आज महिलाओं के साथ ही पुरुषों में भी खासा रुझान देखने को मिल रहा है। आभूषणों की दुकानों पर जुट रही भीड़ सोने-चांदी की आसमान चढ़ती कीमतों को जैसे मुंह चिढ़ा रही है। धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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