महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में हुए विमान हादसे में उप मुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया। विमान में सवार पांच अन्य लोग भी इस हादसे में मारे गये हैं। यह दुर्घटना तब हुई जब एनसीपी नेता अजित पवार और अन्य लोगों को ले जा रहा विमान बारामती में रनवे के पास क्रैश लैंड हो गया। देश ने पिछले कुछ महीने पहले ही एक बड़ा विमान हादसा झेला, कई बड़े नेता पहले भी विमान दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं।
घटनास्थल पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार जब विमान नीचे आ रहा था, तो ऐसा लगा कि यह क्रैश हो जाएगा और यह क्रैश हो गया। फिर इसमें धमाका हुआ। बहुत बड़ा धमाका हुआ। उसके बाद, हम यहां भागे और देखा कि विमान में आग लगी हुई थी। विमान में फिर से 4-5 धमाके हुए और लोग यहां आए, उन्होंने लोगों को विमान से बाहर निकालने की कोशिश की। लेकिन क्योंकि यह बहुत बड़ी आग थी, इसलिए लोग मदद नहीं कर पाए।
अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उपमुख्यमंत्री थे, जिन्होंने लगातार छह बार यह पद संभाला। 1982 में अजित पवार ने एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड में चुने जाने के बाद अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 1991 में वे पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए। वे पहली बार 1991 में बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए और बाद में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए यह सीट खाली कर दी। वे बारामती विधानसभा क्षेत्र से सात बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए। नवंबर 2019 में उन्होंने एनसीपी के एक धड़े के साथ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हुए और उपमुख्यमंत्री बने।
विमान दुर्घटना क्यों हुई, कैसे हुई, इसकी जांच होगी। लेकिन विमान दुर्घटनाओं का देश में अपना एक इतिहास बन चुका है। आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस से लेकर अजित पवार तक कई बड़े नेताओं की जान विमान दुर्घटनाओं में जा चुकी है। कुछ ही महीने पहले अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर रहा बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सनसनी फैल गई। टेकऑफ के कुछ ही क्षण बाद विमान अहमदाबाद के मेघाणीनगर इलाके में एक रिहायशी क्षेत्र में स्थित इमारत से टकरा गया था। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी इस दुर्घटना में मारे गये।
23 जून 1980 को संजय गांधी सुबह एक प्रशिक्षण उड़ान भर रहे थे। वे खुद विमान उड़ा रहे थे और उनका विमान अचानक नियंत्रण से बाहर होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उनकी उम्र महज 33 वर्ष थी। 30 सितम्बर 2001 को माधवराव सिंधिया एक राजनीतिक रैली को संबोधित करने के लिए एक चार्टर्ड विमान से दिल्ली से उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक रैली के लिए जा रहे थे। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद उनका विमान खराब मौसम और तकनीकी खराबी के चलते उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के मोटला गांव के पास क्रैश हो गया। विमान में आग लग गई और सिंधिया भी नहीं बच पाए। साथ ही एक पत्रकार, पायलट और सह-पायलट की भी मौत हो गई थी।
3 मार्च 2002 लोकसभा अध्यक्ष रहते हुए जीएमसी बालयोगी भारतीय वायुसेना के बेल 206 हेलीकॉप्टर से यात्रा कर रहे थे। हेलीकॉप्टर आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी के कारण नियंत्रण खो बैठा और आपात लैंडिंग की कोशिश में एक दलदली क्षेत्र में क्रैश हो गया। हादसे में बालयोगी, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी और पायलट की मौके पर ही मौत हो गई। 3 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी भी हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए। इस घटना में वाईएसआर के समेत सभी पांच सवारों का निधन हो गया था।
30 अप्रैल 2011अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोर्जी खांडू का हेलिकॉप्टर 13 हजार फीट की ऊंचाई पर सेला पास के करीब दुर्घटनाग्रस्त हो गया। करीब चार दिन बाद 4 मई 2011 को मलबा और सभी 5 शव पाए गए, जिसमें मुख्यमंत्री, दो पायलट, सुरक्षा अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति शामिल थे। 8 दिसंबर 2021भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर के पास एमआई-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वह अपनी पत्नी और 11 अन्य लोगों के साथ सुलू से वेलिंगटन जा रहे थे। इस हादसे में उनकी पत्नी मधुलिका राबत समेत कुल 13 लोगों की जान गई। जनरल रावत ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद को खत्म करने में अहम योगदान दिया था।
जनरल रावत की मौत के तीन साल बाद 2024 लोकसभा में रक्षा मामलों की स्थायी समिति की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि एमआई-17 हादसा मानवीय चूक से हुआ था। लेकिन तमाम दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाएं रोकने के कोई बहुत ठोस कदम उठाए गए हों, ऐसा लगा नहीं। चूक मानवीय हो या मशीनी, कहीं न कहीं दुर्घटना में लापरवाही भी एक बड़ा कारण होता है। भारतीय तो यह कह कर तसल्ली कर लेते हैं कि मौत बहाना तलाशती है, कहां-कैसे होगी यह पूर्वनिर्धारित होता है। लेकिन कहीं न कहीं, विमान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ईमानदार प्रयास तो करने ही होंगे।
Editorial
एक और विमान दुर्घटना…
