संपादकीय
विश्व खुशी दिवस

संजय सक्सेना
आज विश्व खुशी दिवस है। आज का दिन खुशी मनाने का दिन है, खुशी एक मूलभूत मानवीय लक्ष्य है। लेकिन सही मायने में खुशी या प्रसन्नता अनुभव करने से अधिक आती है, किसी के देने से शायद उतनी नहीं। संयुक्त राष्ट्र महासभा इस लक्ष्य को मान्यता देती है और आर्थिक विकास के लिए अधिक समावेशी, न्यायसंगत और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करती है जो सभी लोगों की खुशी और कल्याण को बढ़ावा दे।
प्रश्न तो उठता ही है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खुश कौनसा देश है? इसका जवाब देने के लिए ‘वल्र्ड हैप्पीनेस इंडेक्स’ की नई रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी देश फिनलैंड लगातार नौवीं बार दुनिया का सबसे खुशनुमा देश माना गया है। इसके अलावा अन्य नॉर्डिक देश जैसे कि आइसलैंड, डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे भी इस सूची के टॉप 10 में अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं। पिछले तीन सालों से लगातार गाजा, लेबनान और ईरान में युद्ध लड़ रहा इजरायल भी इस सूची में आठवें नंबर पर रहा है, यह वास्तव में आश्चर्य की बात कही जा सकती है।
भारत की रैंकिंग इस बार 116 रही है, जो कि युद्ध प्रभावित और पिछले साल 12 दिन का युद्ध लडऩे वाले देश ईरान से भी पीछे है। हालांकि भारत ने अपनी रैंकिंग पिछली बार की तुलना में सुधारी है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और वेलबीइंग रिसर्च सेंटर द्वारा सार्वजनिक की जाने वाली यह रिपोर्ट हर वर्ष अपने विषय के कारण चर्चा में रहती है। इस रैंकिंग पद्धति में शामिल सभी देशों के कुछ लोगों से इनकी टीम सवाल पूछती है और फिर उन लोगों के जीवन मूल्यांकन के तीन साल के औसत के आधार पर रैंकिंग दी जाती है। इसमें लोग अपने देश में बिताए जा रहे जीवन को 0 से 10 के बीच में नंबर देते हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अनुसार यह रिपोर्ट मुख्यत: छह मानकों पर निर्भर करती है। इसमें प्रति व्यक्ति आय, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार की धारणा शामिल हैं।
इस रैंकिंग में पिछले तीन साल से लगातार युद्ध लड़ रहे इजरायल की रैंकिंग आठ है, वहीं पिछले साल 12 दिन युद्ध, अभी युद्ध से जूझ रहे और लगातार अपने देश के नेताओं को खोने वाले ईरान की रैंकिंग 97वें है। लेकिन यह दोनों ही देश भारत से आगे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल को 10 में से 7.187 नंबर मिले हैं, तो वहीं ईरान को 5.151 नंबर मिले हैं। ईरान की जीवन प्रत्याशा दर 64 वर्ष है, वहीं इजरायल में यह बढक़र 70.8 हो जाती है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा दर 58.2 फीसदी है। भारत के पीछे होने का प्रमुख कारण, उसका कई मामलों में कमजोर प्रदर्शन है। लोगों के बीच में असमानता के मामले में भारत 92वें स्थान पर है, सामाजिक समर्थन 123वें स्थान पर और प्रति व्यक्ति जीडीपी 89वें स्थान पर है। हालांकि, सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत स्वतंत्रता (61वां स्थान) और भ्रष्टाचार की धारणा (64वां स्थान) में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करता है।
इस वैश्विक रिपोर्ट में पड़ोसी देश पाकिस्तान भी भारत से आगे बताया गया है। 4.868 के औसत स्कोर के साथ पाकिस्तान 104वें स्थान पर है, तो बांग्लादेश 127, अफगानिस्तान 147वें और श्रीलंका, नेपाल क्रमश: 99वें और 134वें स्थान पर हैं। जबकि देखा जाए तो इन देशों के हालात भारत से कहीं भी अच्छे नहीं कहे जा सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर जारी की जाने वाली कई रिपोर्ट की भारत में लोगों द्वारा और सरकार द्वारा आलोचना भी की जाती है। लोगों का तर्क होता है कि ऐसी रिपोर्ट जानबूझकर भारत के विषय में गलत रिपोर्ट पेश करती है। चाहें, वह हंगर इंडेक्स हो या हैप्पीनेस इंडेक्स सरकार और उसके समर्थकों ने इसका विरोध किया है। एक तरफ सरकार है, जो कि इसका विरोध करती है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इन रिपोर्ट्स को आधार बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश करता है।
लेकिन, वास्तविकता यह है कि भारत एक ऐसा देश है, जहां के लाखों लोग केवल इसलिए दुखी होते हैं, क्योंकि उनका पड़ौसी बहुत सुखी है, पैसे वाला है या उसके पास उससे अधिक सुख-सुविधाएं हैं। यह मानसिकता भी हमें कई बार तनाव के दलदल में फंसा देती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य और पैसे के अलावा हमारी खुशियों को बहुत आम सी बातें प्रभावित करती हैं जैसे कि दूसरे के साथ खाना शेयर करना, किसी का साथ होना और घर में लोगों का होना. शोध में उदाहरण देते हुए कहा गया है कि मैक्सिको और यूरोप में चार से पांच लोगों वाले घर को सबसे खुशहाल माना जाता है। खुशहाली पैसे और विकास के बारे में नहीं है बल्कि यह विश्वास, लोगों से संबंध और यह जानने में है कि आपके अपने आपके साथ हैं। अगर हम खुशहाल समुदाय और मजबूत अर्थव्यवस्था चाहते हैं तो हमें उन चीजों में निवेश करना चाहिए जो हमारे लिए असल मायनों में जरूरी हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 12 जुलाई 2012 के अपने प्रस्ताव संख्या 66/281 में 20 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस घोषित किया, जिसमें विश्वभर में मनुष्यों के जीवन में खुशी और कल्याण को सार्वभौमिक लक्ष्य और आकांक्षाओं के रूप में मान्यता दी गई और सार्वजनिक नीति उद्देश्यों में इनकी मान्यता के महत्व को रेखांकित किया गया। इसमें सतत विकास, गरीबी उन्मूलन, खुशी और सभी लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने वाले आर्थिक विकास के लिए अधिक समावेशी, न्यायसंगत और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता को भी मान्यता दी गई।
भारत के कई राज्यों में प्रसन्नता पर काम किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में आनंद विभाग ही बना दिया गया है। लेकिन यह विभाग कागजों तक ही सिमट कर रह गया है। कुछ ऐसे औपचारिक कार्यक्रमों का आयोजन कर इतिश्री कर ली जाती है, जिनका वास्तव में खुशी या प्रसन्नता से कोई खास लेना-देना नहीं होता। हर विश्व खुशी दिवस पर इस विभाग को याद आती है और फिर सो जाता है। वैसे सरकार की फ्रीबीज योजनाएं कुछ लोगों के चेहरों पर खुशी तो ला ही देती हैं, भले ही वो कुछ देर की हो।
फिर भी, हमें मानव जन्म मिला है, कुछ ऐसा करें कि हमसे लोग खुश रहें और हम हर हाल में प्रसन्न रहने का प्रयास करें। छोटी-छोटी खुशियों का अनुभव करें, उन्हें जियें। हमारे अंतर्मन को इसके लिए तैयार करें, तो हम अधिक खुश रह सकते हैं। विश्व खुशी दिवस की प्रसन्नता से ओतप्रोत शुभकामनाएं।





