संपादकीय
शीर्ष 50 में चार विश्वविद्यालय…

संजय सक्सेना
इसे गर्व की बात भी कह सकते हैं और राहत की बात भी कि इस बार क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों ने दुनिया के शीर्ष 50 में जगह बनाई है। इसमें आईआईटी और जेएनयू के साथ आईआईएम अहमदाबाद भी शामिल है, जिसे मार्केटिंग, बिजनेस और मैनेजमेंट स्टडीज में वैश्विक स्तर पर टॉप 50 में स्थान मिला है। वहीं, इंडियन स्कूल ऑफ माइंस यानि आईआईएम यूनिवर्सिटी, धनबाद को मिनरल और माइनिंग इंजीनियरिंग स्टडीज में विश्व स्तर पर 21वां स्थान हासिल हुआ है।
विश्वविद्यालय रैंकिंग के लिए प्रसिद्ध लंदन स्थित क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स ने क्यूएस वल्र्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बाय सब्जेक्ट का 16वां वार्षिक संस्करण प्रकाशित किया है। यह रैंकिंग 100 से अधिक देशों के 1,900 विश्वविद्यालयों में 21,000 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों का मूल्यांकन करती है, जिसमें 55 विषय और पांच व्यापक संकाय क्षेत्र शामिल हैं।
क्यूएस वल्र्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 के अनुसार, भारत ने विभिन्न विषयों और संकाय क्षेत्रों में शीर्ष 50 में कुल 27 स्थान हासिल किए हैं। यह पिछले साल 2024 में मिले 12 स्थानों से दोगुने से भी अधिक है और ये स्थान 12 अलग-अलग संस्थानों ने प्राप्त किए हैं। मुख्य संस्थानों में आईआईएम यूनिवर्सिटी, धनबाद शामिल है, जिसे खनिज और खनन इंजीनियरिंग में वैश्विक स्तर पर 21वां स्थान मिला है। वहीं, आईआईएम अहमदाबाद को व्यवसाय एवं प्रबंधन अध्ययन और विपणन दोनों में 21वां स्थान प्राप्त हुआ है। विशेष रूप से विपणन के क्षेत्र में यह भारत का पहला स्थान है, क्योंकि इससे पहले भारत कभी भी विपणन की वैश्विक रैंकिंग में शामिल नहीं हुआ था।
क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स की सीईओ जेसिका टर्नर ने कहा, इस वर्ष भारत का उदय केवल आकार के बारे में नहीं है, यह गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में गति के बारे में है। इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और व्यवसाय में व्यापक सुधार एक ऐसी प्रणाली का संकेत देता है जो उद्देश्यपूर्ण ढंग से गति पकड़ रही है। अगला चरण इस बात से निर्धारित होगा कि संस्थान कितनी प्रभावी ढंग से अनुसंधान क्षमता को बढ़ाते हैं, वैश्विक साझेदारी का निर्माण करते हैं और विश्व मंच पर अपनी विशिष्टता को और निखारते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी दिल्ली ने इस संस्करण में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसने चार विषयों में भारत का नेतृत्व किया है – केमिकल इंजीनियरिंग में 48वां स्थान, पहली बार शीर्ष 50 में, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में 36वां, मैकेनिकल, एयरोनॉटिकल और मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग में 44वां, एक दशक से अधिक समय में सर्वश्रेष्ठ, इंजीनियरिंग व प्रौद्योगिकी व्यापक क्षेत्र में 36वां और कंप्यूटर विज्ञान में 45वें स्थान के साथ दूसरे स्थान पर है। आइआइटी बांबे, खडग़पुर और मद्रास ने भी शीर्ष 50 में अपनी स्थिति मजबूत की है। इसके अतिरिक्त, जेएनयू और बीआइटीएस पिलानी ने अपनी शैक्षणिक प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर साबित किया है।
यह अध्ययन विषय आधारित है, और इसमें जब भारतीय संस्थानों ने अच्छी रेंकिंग प्राप्त की है, तो ये सुधार की निरंतर प्रक्रिया को दर्शाता है। असल में जब विश्व भर के विश्वविद्यालयों की सामान्य रैंकिंग का मामला आता है, तो भारत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं होती। हमारे आईआईटी संस्थानों ने सबसे पहले रैंकिंग भी पाई और अपनी प्रतिष्ठा विश्व में स्थापित की। आईआईटी दिल्ली और इसके मुम्बई, खडग़पुर, मद्रास भी तेज दौड़ में शामिल रहे हैं। आईआईएम अहमदाबाद ने जरूर बेहतर प्रदर्शन कर स्थान हासिल कर लिया है। जेएनयू बीच में कुछ ढीला पड़ गया था, क्योंकि यहां राजनीति ज्यादा ही हावी हो गई, लेकिन अब एक बार फिर उसने अपना जलवा बिखेरा है।
अच्छी बात यह है कि हमारे पास विषय विशेषज्ञों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि आज भी जो अच्छे विद्यार्थी निकलते हैं, उनमें से अधिकांश विदेश चले जाते हैं। क्योंकि भारत में बेहतर अवसर और बेहतर वेतन का अकाल जैसा होता है। फिर भी कुछ प्रतिभाएं भारत में रहकर दूसरी प्रतिभाओं को निखारने के लिए रुक जाते हैं, तो इस तरह की रैंकिंग मिल जाती है। अभी एक समस्या एआई में आ रही है। देश के इंजीनियरिंग कालेजों में एआई विषय तो शुरू कर दिया गया है, लेकिन अच्छे पढ़ाने वाले  ही नहीं है। बच्चे आनलाइन ही पढ़ पा रहे हैं, लेकिन इससे स्किल में सुधार की गुंजाइश बहुत कम है।
एआई के लिए भी आईआईटी संस्थानों ने आनलाइन कोर्स शुरू कर इस मामले में कुछ राहत दी है, इसके बावजूद बहुत गुंजाइश है। फिर भी, विश्व रैंकिंग वाली हालिया रिपोर्ट से हम इतने संतुष्ट तो हो सकते हैं कि पहले सौ में आना मुश्किल था, अब पचास में एक से अधिक संस्थान आ रहे हैं। शिक्षा के परिसर यदि राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त हो जाएं, तो वह दिन दूर नहीं, जब हम टाप टैन में कब्जा कर पाएंगे।

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