संजय सक्सेना
सरकार दावे पर दावे कर रही है कि ईंधर गैस की कोई कमी नहीं है, इधर देश भर में रसोई गैस की मारामारी मची है। आनलाइन बुकिंग ठप जैसी ही है, गैस एजेंसियों के बाहर लाइनें लगी हैं, आपूर्ति वाले वाहन लूटने की खबरें भी आने लगी हैं। घर में सिलेंडर की मांग ऐसी हो गई है, जैसे कोई खजाना मांग रहा हो। और बाहर होटलों में खाने का मैन्यू कम होता जा रहा है। खाने से लेकर चाय-नाश्ते के होटल और रेहडिय़ां बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
पश्चिम एशिया संकट बढऩे की आशंकाओं के बीच भारत में आम आदमी बुरी तरह प्रभावित होने लगा है। लोगों को डर है कि गैस आपूर्ति बहुत जल्द बंद न हो जाए। घरेलू गैस के लिए हर सेकंड हजारों बुकिंग से क्रैश साइट दूसरे दिन भी नहीं खुलीं। परिणामस्वरूप जरूरतमंदों के चूल्हे ठंडे पडऩे लगे हैं।
इधर, कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई बंद होने के बाद होटल कारोबारियों और चाय-नाश्ते वाले छोटे कारोबारियों पर का संकट गहरा गया है। एसोसिएशन का दावा है कि किसी के पास दो तो किसी के पास 3 दिन का ही स्टॉक शेष है। मध्य प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग बंद की स्थिति में है। जो भी लगा रहा है, नंबर नहीं लग रहा। कहीं सर्वर डाउन है, तो कहीं जवाब मिल रहा है कि ये नंबर बंद है। इसलिए लोग बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। गैस की वेटिंग 7 से 8 दिन तक पहुंच गई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेशभर में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाद सुबह से लोगों की भीड़ लगी हुई है।
कुछ शहरों से सिलेंडर की कालाबाजारी के मामले भी सामने आने लगे हैं। नौ सौ का सिलेंडर 1500 रुपए तक या इससे भी ज्यादा में मिल रहा है। एजेंसियों के कार्यालयों में भीड़ है, लेकिन कई जगह उनके सप्लाई वाहनों से भी कालाबाजारी की खबरें आ रही हैं। इधर, बाजार में इंडक्शन और डीजल भट्ठी की कीमतें बढ़ी हैं। भोपाल में इंडक्शन की बिक्री 7 गुना तक बढ़ गई है। वहीं, प्रदेश में 50 हजार होटल-रेस्टॉरेंट में गैस खत्म होने के कगार पर है। सतना के 86 लोगों ने सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की है। उज्जैन में एक प्राइवेट अस्पताल की कैंटीन में डीजल भट्टी से खाना बनाया जा रहा है।
होटल-रेस्त्रों को एलपीजी सप्लाई बंद करने के बाद कई ने डीजल भट्टी की खरीदी के ऑर्डर कर दिए हैं। लेकिन, इसकी भी वेटिंग शुरू हो गई है। अचानक बढ़ी डिमांड के चलते दूसरे विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। मार्केट में इंडक्शन की खरीदी जोर पकड़ रही है। पर्यटन निगम के होटलों में भी जहां स्टॉक खत्म हो गया, वहां गुरुवार को इंडक्शन पर खाना पकाया गया। क्रोमा के सेल्स ऑफिसर बताते हैं कि आमतौर पर जहां दिन भर में बमुश्किल 10- 12 इंडक्शन बिकते हैं। वहीं, पिछले दो दिनों में 30 से 35 यूनिट तक की बिक्री हुई है। कुछ मॉडल पूरी तरह खत्म हो गए हैं।
किल्लत देखते हुए सरकार ने बुकिंग के नियमों में फिर से बदलाव किया है। शहरी क्षेत्रों में बीस से बढ़ाकर 25 दिन पहले ही कर दिया गया था, अब ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर 45 दिन बाद बुक किया जा सकेगा।
मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जो लोग पहले औसतन 55 दिनों में सिलेंडर बुक कराते थे, उन्होंने अचानक 15-15 दिनों के अंतर पर बुकिंग शुरू कर दी थी। इस तरह की एडवांस और जल्दबाजी में की जा रही बुकिंग से सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा था।
मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी मंत्रालय की संयुक्त सचिव का बयान देखें-देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर स्थिति काफी सहज और संतोषजनक है। भारत रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल का इस्तेमाल करता है और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर होने के कारण पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों की उपलब्धता को लेकर भरोसा बना हुआ है। 9 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का आदेश दिया था। इसके बाद घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है और अब यह 25 प्रतिशत से बढक़र 28 प्रतिशत हो गया है।
अब सवाल तो उठेगा ही कि जब उत्पादन बढ़ा है, स्टोर पर्याप्त है, तो फिर गैस के लिए मारामारी क्यों हो रही है? व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति बंद करने के बाद तो यह और भी सुलभ हो जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। या तो सरकार कुछ छिपा रही है, या फिर लोगों की घबराहट के कारण ये स्थिति बन रही है। वितरण सिस्टम की खामी इसमें बड़ा कारण माना जाता रहा है। सामान्य स्थितियों में कुछ समझ में नहीं आता, आपात स्थिति आते ही हमारी व्यवस्थाएं अचानक चरमरा जाती हैं। यह बड़ा लैक्यूना है। लेकिन आज की स्थिति में क्या किया जाए?
्वसे एक राहत की बात यह मानी जा सकती है कि अमेरिका ने रूस से सभी देशों को तेल की आपूर्ति की सहमति दे दी है। फिर भी, भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।
एक खबर यह भी है कि ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने एलएनजी प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40 प्रतिशत एलएनजी, जो करीब 2.7 करोड़ टन सालाना होता है, कतर से ही आयात करता है। यानि इतनी गैस तो आ ही नहीं पा रही। फिर पर्याप्त स्टाक कैसे कहा जा रहा है? बड़ी मात्रा में लोगों को गैस सिलेंडर की सप्लाई भी तो हो रही है, उसकी कमी कहां से पूरी हो रही है?
सरकार की मजबूरी है कि वह सच बोल नहीं सकती। और लोगों को घबराने की आदत पड़ गई है। शायद, इसी कारण ये स्थितियां बन रही हैं। कमी भी है और लोग घर में ही स्टाक भी करना चाह रहे हैं। युद्ध रुकने की गुंजाइश पर ही शायद इन स्थितियों में सुधार होगा। वैसे फिलहाल तो इसके आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
