Editorial…. सीजफायर की बातचीत

संजय सक्सेना
ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर बड़े हमले किए जा सकते हैं, जिसकी तैयारी अमेरिका और इजराइल ने कर ली है। यदि कहीं परमाणु हमले किये गये, तो इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भी भुगतना पड़ेगा। पूरी दुनिया में इस युद्ध के चलते तापमान बढऩे लगा है और अर्थव्यवस्थाएं चरमराने का दौर भी तेज हो गया है।
जहां तक युद्ध की बात है तो एक रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में 45 दिन का सीजफायर लागू किया जाएगा, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी। इस बातचीत में जो मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, उनका कहना है कि अगले 48 घंटे इस डील के लिए आखिरी मौका हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर हमले की योजना तैयार कर रखी है। हालांकि, ईरान फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट और अपने परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर कोई बड़ी रियायत देने के मूड में नहीं दिख रहा है।
इधर, ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले बढ़े तो वह ग्लोबल सप्लाई चेन को ठप कर देगा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानका कहना है कि वह होर्मुज के अलावा दूसरे समुद्री रास्तों को भी निशाना बना सकता है।
इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी के बाद आज घरेलू शेयर बाजार में फिर से भारी गिरावट दिख रही है। सुबह बाजार खुलने के साथ ही बीएसई सेंसेक्स में करीब 500 अंक गिरावट आई है जबकि निफ्टी 22,600 अंक से नीचे चला गया। सुबह 10 बजे सेंसेक्स 500.84 अंक यानी 0.68 प्रतिशत गिरावट के साथ 72,818.71 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी भी 140.95 अंक यानी 0.62 प्रतिशत फिसलकर 22,572.15 अंक पर आ गया।
पिछले सत्र में सेंसेक्स 185.23 अंक की तेजी के साथ 73,319.55 अंक पर बंद हुआ था। इसी तरह निफ्टी भी 33.70 अंक की तेजी के साथ 22,713.10 पर पहुंच गया था। हालांकि कारोबार के दौरान इसमें काफी गिरावट आई थी। लेकिन अंतिम एक घंटे में बाजार ने पलटी मारी थी। सेंसेक्स 158 अंक की तेजी के साथ 73,477.53 अंक पर खुला जबकि निफ्टी 67 अंक उछलकर 22,780 अंक पर खुला। लेकिन जल्दी ही इनमें गिरावट आ गई। सेक्टर के हिसाब देखें तो निफ्टी ऑयल एंड गैस में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। यानि साफ है कि युद्ध से सबसे ज्यादा यही क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।
अभी तो युद्ध कथित तौर पर सामान्य चल रहा है। यदि इसमें परमाणु ठिकानों की बारी आ गई, परमाणु हथियारों का सहारा लिया जाता है, तो पूरी दुनिया खतरनाक तरीके से चपेट में आ जाएगी। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी नाकाबंदी की वजह से पहले ही लगभग 20 प्रतिशत ग्लोबल ऑयल सप्लाई कम हो गई है। माना जा रहा है कि अगर जंग रुकती है, तो सप्लाई को फिर से सामान्य करने में कुछ महीने लग सकते हैं। लेकिन, अगर एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले हुए, तो उससे उबरने में कई साल लग जाएंगे।
कुवैत, कतर और सऊदी अरब की ऑयल-गैस फैसिलिटीज और ईरान की साउथ पार्स गैस फील्ड को पहले ही इस युद्ध में काफी नुकसान पहुंचा है। कतर के ऊर्जा मंत्री शेरिडा अल-काबी ने तो पिछले महीने कहा था कि उनके देश की निर्यात क्षमता 17 प्रतिशत तक कम हो सकती है। अभी देशों के पास अपना स्ट्रैटिजिक रिजर्व है और इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी की अपील पर सदस्य देशों ने भी ऑयल रिजर्व रिलीज करने पर हामी भरी है। बीते दिनों भारत ने तेल मार्केटिंग कंपनियों को क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम के दबाव से बचाने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की। लेकिन, अगर हमले जारी रहते हैं, तो सारे इमरजेंसी इंतजाम भी नाकाफी साबित होंगे। इस बीच, क्रूड ऑयल के 200 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के अनुमान भी लगाए जा रहे हैं।
खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था तेल से जुड़ी है और उस तेल से कई देशों की अर्थव्यवस्था जुड़ती है। इसमें गड़बड़ी से मंदी और महंगाई की दोहरी मार पड़ेगी, जिसका असर भी दिखने लगा है। होर्मुज को खुलवाने के लिए कई देश मिलकर प्रयास कर रहे हैं। यह तो जरूरी है ही, जल्द ही यह युद्ध भी रुकना चाहिए।
यह तय है कि जीत-हार के दावे और इसका विश्लेषण किया जाता है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। पूरी दुनिया का बाजार प्रभावित हो रहा है, अमेरिका में  तो ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन तक हो रहे हैं और उनका विरोध बढ़ रहा है, दूसरी ओर ईरान में लोग सरकार के साथ आ गए हैं। यही नहीं, आज तो खबर यह भी आई है कि इराक में लाखों लोग अमेरिकी हमलों के खिलाफ सडक़ पर उतर आए हैं। केवल सेंसेक्स की बात नहीं है, महंगाई ने भी मुंह फाडऩा शुरू कर दिया है। दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं। मध्यम वर्ग की कराह तेज होती जा रही है। उम्मीद करनी चाहिए कि युद्ध रुके और जल्द हालात सामान्य हों। लेकिन ट्रंप की सनक पागलपन की ओर बढ़ती दिख रही है, जो पूरी दुनिया को बर्बादी की तरफ ही ले जाएगी।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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