MP : बाढ़ राहत घोटाले में बड़ौदा की तत्कालीन तहसीलदार और पटवारियों की भूमिका गंभीर

भोपाल। बाढ़ राहत घोटाले में बड़ौदा की तत्कालीन तहसीलदार और पटवारियों की भूमिका गंभीर पाई गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार 960 किसानों को राहत राशि मिलनी थी, लेकिन 794 किसानों की रकम जानबूझकर गलत खातों में ट्रांसफर कर दी गई। यह राशि 127 अपात्र व्यक्तियों के खातों में भेजी गई, जो लाभार्थी सूची में शामिल नहीं थे।
जांच में सामने आया कि मामला केवल गलत खातों में पैसा भेजने तक सीमित नहीं था, बल्कि राशि को योजनाबद्ध तरीके से निकालकर आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2021 में राहत वितरण के दौरान करीब 2.57 करोड़ रुपए 87 लोगों के 127 खातों में जमा किए गए। इन खातों का उपयोग वास्तविक हितग्राहियों के बजाय रकम एकत्र करने और निकालने के लिए किया गया।
केसमें तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने 110 आरोपियों में से चार और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे कुल गिरफ्तारियां 30 हो गई हैं, जबकि 80 आरोपी फरार हैं। जांच में सामने आया कि राशि को छोटे-छोटे हिस्सों में निकालकर लेनदेन सामान्य दिखाने की कोशिश की गई। पुलिस छापेमारी कर आरोपियों की तलाश में जुटी है।
टुकड़ों में निकासी कर छुपाया घोटाले का पूरा ट्रैक
घोटाले में खातों में जमा राशि को एक साथ निकालने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में निकाला गया। 50 हजार, 60 हजार, 90 हजार और एक लाख रुपए तक की रकम कई खातों से क्रमवार निकाली गई। कुछ खातों में बार-बार राशि जमा कर निकासी की गई, जिससे लेनदेन सामान्य दिखे। जांच में सामने आया कि एक खाते में औसतन छह किसानों की राशि डाली गई, जिससे सुनियोजित तरीके से ट्रैक छुपाने की कोशिश की गई।



