MP भ्रष्टाचार की हद : टंट्या मामा की प्रतिमा मेटल की जगह ‘फाइबर’ की निकली

खरगोन. आदिवासी गौरव और स्वतंत्रता संग्राम के नायक क्रांति सूर्य टंट्या मामा भील के नाम पर भाजपा आदिवासियों क़ो रिझाने का. काम कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ टंट्या मामा की प्रतिमा में ही भ्रष्टाचार हो गया।  खरगोन के बिस्टान नाका चौराहे पर स्थापित की गई टंट्या मामा की मूर्ति संगमरमर या धातु की बजाय फाइबर की निकली, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। मामले की पुष्टि होते ही जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने कड़ा रुख अपनाते हुए मूर्ति को तत्काल बदलने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि दिसंबर 2022 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बिस्टान नाका चौराहे का नाम टंट्या मामा भील के नाम पर करने और वहां उनकी प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। इसी क्रम में 15 नवंबर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर नगर पालिका खरगोन द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मूर्ति का लोकार्पण किया गया था। चौराहे को आधिकारिक रूप से टंट्या मामा चौराहा घोषित भी किया गया।

लोकार्पण के बाद से ही शिकायतें
हालांकि, लोकार्पण के बाद शिकायतें सामने आईं कि प्रतिमा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। कलेक्टर भव्या मित्तल ने बताया कि विस्तृत जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मूर्ति धातु या संगमरमर की नहीं, बल्कि FRP से बनी है। उन्होंने नगर पालिका के मुख्य नगर अधिकारी (CMO) को ठेकेदार, सहायक यंत्री और उपयंत्री को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने साफ कहा कि ठेकेदार को अपने खर्च पर निर्धारित मापदंडों के अनुसार नई मूर्ति स्थापित करनी होगी।

कार्यक्रम में व्यवधान न आए इसलिए की स्थापित
नगर पालिका सीएमओ कमला कौल ने बताया कि 13 नवंबर को ठेकेदार द्वारा लाई गई मूर्ति पहली नजर में संगमरमर जैसी प्रतीत हो रही थी। चूंकि 15 नवंबर का कार्यक्रम पहले से तय था और सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, इसलिए कार्यक्रम में व्यवधान न आए, इस कारण मूर्ति स्थापित कर दी गई। बाद में तकनीकी जांच में इसके फाइबर की होने की पुष्टि हुई।

ठेकेदार से स्वीकार की गलती
ठेकेदार ने गलती स्वीकार करते हुए माफी पत्र सौंपा है और भावनाएं आहत करने पर खेद जताया है। उसने मूर्ति को निःशुल्क दान करने और किसी भी भुगतान का दावा छोड़ने की बात कही है। अब नगर पालिका की प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) की बैठक में आगे की कार्रवाई और नई मूर्ति की सामग्री पर फैसला लिया जाएगा। इधर, इस पूरे मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 8 जनवरी को प्रदर्शन कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

कांग्रेस ने दी चेतावनी
नाईक ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की 24 सितंबर 2025 की PIC बैठक में स्पष्ट रूप से पत्थर या धातु की मूर्ति लगाने का निर्णय हुआ था और उसी अनुसार टेंडर भी जारी किया गया था। इसके बावजूद करीब 9.90 लाख रुपये की बताई जा रही मूर्ति फाइबर की निकली, जो बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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