भोपाल। मध्य प्रदेश के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल की एक नोटशीट से हड़कंप मच गया है। मंत्री पटेल ने यह नोटशीट मुख्य सचिव (सीएस) आईएएस अनुराग जैन को लिखी है। इसमें उन्होंने पूर्व सीएस के मामले में कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा है कि जो अफसर लोकायुक्त को जरुरी तथ्य नहीं दे रहे, उनकी जिम्मेदारी तय करें।
मध्यप्रदेश का बहुचर्चित पोषण आहार और टेक होम राशन घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन रसूखदार चेहरों और मददगार अफसरों की घेराबंदी शुरु हो गई है, जो जांच को पिछले एक साल से लटकाए हुए हैं।
असल में प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ चल रही जांच में अब मंत्री प्रहलाद पटेल ने कड़ा रुख अपनाया है।इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में एक लिखित जवाब पेश किया था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आजीविका मिशन में हुए इस घोटाले को लेकर मार्च 2025 में जांच प्रकरण दर्ज किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इस मामले में आपराधिक केस दर्ज नहीं हो सका है। इसका सबसे बड़ा कारण पंचायत विभाग के उन अफसरों की चुप्पी है, जो लोकायुक्त को जानकारी देने के बजाय फाइलों को दबाए बैठे हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से पेश जबाव में बताया गया है कि इकबाल सिंह और ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ प्रकरण में लोकायुक्त में वर्ष 2025 में 12 अगस्त, इसके बाद 28 नवंबर और वर्ष 2026 में 5 फरवरी को साक्ष्य एवं जानकारी के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और आजीविका मिशन के अफसरों को बुलाया गया था, लेकिन जानकारी देने के लिए कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ, ना ही किसी ने जानकारी भेजी। ऐसा लगातार तीन बार हो चुका है।
इसके बाद इसके बाद लोकायुक्त के विधिक सलाहकार जसवंत सिंह यादव ने 16 फरवरी को पंचायत विभाग की एसीएस दीपाली रस्तोगी, सचिव जीवी रश्मि और आजीविका मिशन की सीईओ हर्षिका सिंह को पत्र लिखकर पोषण आहार के क्रियान्वयन को लेकर कैग द्वारा 2022 में की गई टिप्पणी से संबंधित जानकारी 13 अप्रैल तक आवश्यक रूप से उपलब्ध करवाने को कहा है।
पूर्व विधायक पारस सकलेचा की 2023 में की गई शिकायत के आधार पर यह जांच प्रकरण दर्ज किया गया था। इसको लेकर विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में सवाल पूछा था।
तीन बार बुलावा, फिर भी खाली हाथ रही लोकायुक्त की टीम
जांच की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकायुक्त ने सबूत जुटाने के लिए अफसरों को एक नहीं, बल्कि तीन बार तलब किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव के जवाब के अनुसारः12 अगस्त 2025 को पहली बार विभाग के अफसरों को बुलाया गया था।
28 नवंबर 2025 को दोबारा याद दिलाया गया था।
5 फरवरी 2026 को तीसरी बार मौका दिया गया था।
इन तीनों तारीखों पर न तो कोई अधिकारी उपस्थित हुआ और न ही कोई दस्तावेज भेजे गए।
टेक होम राशन घोटाला
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश में 858 करोड़ रुपए का टेक होम राशन (टीएचआर) काल्पनिक तरीके से दिखाया गया था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि कच्चे माल का जितना उपयोग होना चाहिए था, उतना किया ही नहीं गया। इसके अलावा, पोषण आहार वितरण के दौरान जिन 8 जिलों में लाभार्थी बताए गए थे, वहां असल में उतने लोग मौजूद नहीं थे।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि राज्य सरकार ने केंद्रीय निर्देशों के बावजूद पोषण आहार योजना की खरीद और वितरण की जांच नहीं की।
