भोपाल। मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता पर बहस तेज है।
क्या हैं आरोप?
कलेक्टर कार्यालय में दी गई शिकायत के अनुसार, मंदिर की शासकीय प्रबंधन व्यवस्था के समानांतर एक गैर-सरकारी समिति श्रद्धालुओं से नकद, सोना और चांदी के रूप में दान एकत्र कर रही थी। आरोप है कि इस चढ़ावे की राशि सरकारी खाते के बजाय निजी बैंक खातों में जमा की गई और वित्तीय रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं बरती गईं।
हालांकि, अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने इन्हीं आरोपों की सत्यता जांचने के लिए समिति बनाई है।
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
जांच समिति की अध्यक्षता जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.एस. सोलंकी करेंगे। समिति में जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को सदस्य बनाया गया है।
समिति को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपनी होगी।
जांच में किन बिंदुओं पर होगा फोकस?
समिति मुख्य रूप से इन पहलुओं की जांच करेगी:
क्या किसी अपंजीकृत या गैर-सरकारी समिति ने समानांतर रूप से चढ़ावा एकत्र किया?
नकद, सोना और चांदी के दान का वास्तविक लेखा-जोखा क्या है और उसका रिकॉर्ड सही है या नहीं?
रसीद पुस्तिकाओं, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी हुई या नहीं?
क्या किसी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है?
निरीक्षण के दौरान मिली थीं शिकायतें
बताया जा रहा है कि हाल ही में कलेक्टर प्रीति यादव ने मंदिर का निरीक्षण किया था। इसी दौरान कुछ लोगों ने दान और वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं की मौखिक शिकायत की थी। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी किए।
गर्भगृह के सौंदर्यीकरण की भी होगी पड़ताल
सूत्रों के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में सोने और चांदी से किए गए सौंदर्यीकरण का काम भी इसी समिति के माध्यम से कराया गया था। इसलिए श्रद्धालुओं से मिले सोना, चांदी और नकद दान के संग्रह, उपयोग और उससे जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच के दायरे में आने की संभावना है।
प्रशासन का पक्ष
कलेक्टर प्रीति यादव से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। वहीं जांच समिति के सदस्य मनीष सोलंकी ने कहा कि उन्हें समिति में शामिल किए जाने की सूचना मिल चुकी है और नियमानुसार निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
