High court : रिश्वत केस में बड़ी लापरवाही… लोकायुक्त की फाइल गायब, डीएसपी पर FIR का आदेश

जबलपुर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रिश्वत से जुड़े एक प्रकरण की मूल फाइल गायब होने के मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने और विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला जबलपुर लोक निर्माण विभाग (PWD) में पदस्थ हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक से जुड़ा है। लोकायुक्त की टीम ने 26 अगस्त 2019 को उन्हें एक कर्मचारी से तीन हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। यह प्रकरण फिलहाल ट्रायल कोर्ट में लंबित है।

आवाज के नमूने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका
ट्रायल कोर्ट द्वारा 17 अक्टूबर 2023 को अनिल कुमार पाठक के आवाज के नमूने से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर लिए जाने का आदेश पारित किया गया था। इसी आदेश के खिलाफ अनिल कुमार पाठक ने हाई कोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान सामने आई बड़ी लापरवाही
मामले की सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से यह जानकारी दी गई कि प्रकरण की मूल फाइल गुम हो चुकी है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए।

लोकायुक्त एसपी ने दी जांच की जानकारी
लोकायुक्त एसपी जबलपुर अंजुलता पटले न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुईं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि फाइल गुम होने के मामले में प्रारंभिक जांच कराई गई थी। जांच के दौरान तत्कालीन प्रभारी डीएसपी और मूल पद निरीक्षक आस्कर किंडो ने फाइल गुम होने की जिम्मेदारी स्वीकार की।

MP हाईकोर्ट के सख्त निर्देश
युगलपीठ ने पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस स्थापना, भोपाल को निर्देश दिया कि दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही तीन दिन के भीतर इसकी रिपोर्ट रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।

विभागीय जांच के भी आदेश
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति के चार वर्ष की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए उसके विरुद्ध विभागीय जांच भी प्रारंभ की जाए।

याचिका वापस, लेकिन आदेश प्रभावी
इस दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि एफआईआर दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई से संबंधित सभी निर्देश अनिवार्य रूप से लागू रहेंगे।

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