MP: PWD में कम दामों पर टेंडर ले रहे ठेकेदार,16 जिलों में रोकी निविदा

भोपाल। लोक निर्माण विभाग में टेंडर लेने के लिए ठेकेदारों द्वारा जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। सरकारी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी लगाकर कम दरों पर टेंडर हासिल कर लिए और निम्न स्तर का काम किया जा रहा है। इस बात की शिकायत मिलने के बाद विभाग ने आंतरिक जांच कराई तो यह बात सामने आ गई।
इसके बाद 16 जिलों में निविदाओं को रोक दिया गया। सूत्रों से पता चला है कि विभाग द्वारा अधिकारियों और ठेकेदारों पर कसावट कसी जा रही है। सितंबर और अक्टूबर 2025 के बीच जारी कई निविदाओं की स्वीकृति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
विभाग ने इसे लेकर सख्ती दिखाई है और साफ कर दिया है कि जब तक सभी त्रुटिपूर्ण निविदाओं का दोबारा परीक्षण नहीं हो जाता, तब तक नए कार्यों को स्वीकृति नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं विभाग अब कागजों पर भरोसा करने की बजाय ग्राउंड जीरो’ पर जाकर भौतिक सत्यापन की तैयारी कर रहा है।
इसके लिए अलग से विशेष टीमें बनाई जाएंगी, जो निर्माणाधीन साइटों का जाकर दौरा करेंगी। इसमें देखा जाएगा कि क्या ठेकेदार ने वाकई अपनी मशीनें लगाई हैं या सिर्फ कागजों पर स्वामित्व दिखाया है। मौके पर लैब की मौजूदगी और वहां तैनात इंजीनियरिंग स्टाफ की भी गिनती की जाएगी। विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जब तक सत्यापन रिपोर्ट सही नहीं आती, तब तक भुगतान और नए टेंडरों की प्रक्रिया लंबित रहेगी।
टेंडर शर्त के तहत मूल फॉर्म नहीं भरा
जांच में पता चला कि सागर, रायसेन, सतना और खरगोन सहित कई जिलों में अधिकारियों ने संशोधित निविदा शर्तों को मूल टेंडर डॉक्यूमेंट के मुख्य फॉर्म (बिड डाटा शीट) में शामिल ही नहीं किया। अधिकारियों ने केवल शासन द्वारा जारी आदेश की एक स्कैन प्रति दस्तावेज के अंत में नत्थी कर दी। इसकी मदद से ठेकेदार कम दरों पर टेंडर हासिल कर रहे हैं। ऐसे में जब भी जांच होगी तो ठेकेदार बच निकलेंगे।





