छतरपुर। जिले में लगभग 25 करोड़ रुपये से अधिक के सड़क निर्माण कार्यों के टेंडर गिर्राज कंस्ट्रक्शन कंपनी को गलत तरीके से दिए जाने का मामला सामने आया है, जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनियों को तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि कंपनी ने पात्रता हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आवश्यक मशीनरी — जैसे टेंडम रोलर और मोटर ग्रेडर — के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक नहीं थे। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि जिस इनवॉइस नंबर का उपयोग किया गया, उसे संबंधित विक्रेता कंपनी ने फर्जी बताया। इसके अलावा आरटीओ रजिस्ट्रेशन नंबर भी कथित रूप से गलत श्रेणी के वाहन से जुड़ा पाया गया।
आरोप सीधे विभाग के प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा तक पहुंच रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पूरे मामले की लिखित जानकारी दी गई थी, इसके बावजूद टेंडर निरस्त करने या जांच बैठाने के बजाय संबंधित कंपनी को कार्य आवंटित कर दिया गया।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल टेंडर नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में संभावित भ्रष्टाचार, पक्षपात और फर्जीवाड़े का गंभीर उदाहरण माना जाएगा। सामान्यतः ऐसी स्थिति में विभागीय जांच, तकनीकी मूल्यांकन की पुनर्समीक्षा, और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाली कंपनी पर ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
फिलहाल सार्वजनिक रूप से विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों की स्वतंत्र सत्यापन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोप तथ्यात्मक हैं या नहीं।
