भोपाल। वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को पांच करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। इसके साथ ही कहा है कि जिस तरह सार्वजनिक मंच से पीसीसी चीफ पटवारी ने श्रीराम तिवारी पर आरोप लगाए हैं, उसी तरह सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, अन्यथा मानहानि की कार्रवाई के लिए तैयार रहें। श्रीराम तिवारी की ओर से पटवारी के न्यास की प्रासंगिकता को लेकर दिए गए बयान के बाद पांच सवाल भी किए गए हैं।
यह जानकारी वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से उनके वकील हरीश मेहता और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी। मेहता ने कहा कि दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने वीर भारत न्यास में 500 करोड़ रुपए का घोटाला होने और एक रुपए में जमीन सौंपने का आरोप लगाया था। साथ ही न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी पर भी कई आरोप लगाए थे।
मेहता ने कहा कि तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद पटवारी ने श्रीराम तिवारी पर आरोप लगाए हैं। नोटिस में कहा गया है कि तीन दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से दिए गए गलत बयानों पर स्पष्टीकरण दें और माफी मांगें। यदि माफी मांग लेते हैं तो कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। पटवारी सार्वजनिक रूप से मीडिया के माध्यम से खेद व्यक्त करते हुए विज्ञप्ति जारी करें। मेहता ने कहा कि इन आरोपों से उनके पक्षकार तिवारी की सार्वजनिक छवि को भी ठेस पहुंची है।
अधिवक्ता मेहता ने कहा कि वीर भारत न्यास सभी वर्गों और सभी धर्मों को साथ लेकर काम करने वाला न्यास है। सचिव तिवारी ने जो भी कार्य किए हैं, वे विधि के अनुसार किए हैं। इसलिए उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास पीसीसी चीफ पटवारी ने किया है।
अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने कहा कि वीर भारत न्यास विधिवत पंजीकृत न्यास है। यह कोई निजी न्यास नहीं है। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं और वर्ष 2012 में गठित इस न्यास के अध्यक्ष कांग्रेस शासनकाल में कांग्रेस के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। चौकसे ने कहा कि पांच करोड़ रुपए की मानहानि के नोटिस से प्राप्त राशि, यदि मिलती है, तो उनके पक्षकार द्वारा सार्वजनिक रूप से किसी एनजीओ को दान की जाएगी।
*दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने यह आरोप लगाए थे*
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पांच दिन पहले उज्जैन में लगभग ₹500 करोड़ की सरकारी जमीन और इमारत ‘वीर भारत न्यास’ को मात्र ₹1 की लीज पर सौंपने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि यह ट्रस्ट मुख्यमंत्री के करीबी का है और नियमों को ताक पर रखकर इसे एक निजी संस्था की तरह फायदा पहुंचाया गया है।
