संभल के ‘सिंघम’ IPS केके बिश्नोई:  7 माफियाओं पर कार्रवाई, 800 करोड़ की संपत्ति सीज की

संभल। उत्तर प्रदेश के संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण कुमार (केके) बिश्नोई अपनी सख्त और प्रभावी पुलिसिंग के कारण लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये के सरकारी जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन संभल नगर परिषद के अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कराया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यूपी पुलिस की माफिया विरोधी मुहिम को सुर्खियों में ला दिया।
एनडीटीवी से बातचीत में आईपीएस केके बिश्नोई ने अपने करियर, पारिवारिक संघर्ष, यूपीएससी तक के सफर और उत्तर प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ चलाए गए अभियानों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अब तक शासन द्वारा चिन्हित सात कुख्यात माफियाओं के अवैध साम्राज्य पर कार्रवाई की जा चुकी है और उनकी करीब 800 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त या कुर्क की गई हैं।
संभल में कानून व्यवस्था संभालने की चुनौती
केके बिश्नोई पिछले लगभग 22 महीनों से संभल के एसपी हैं। 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद विवाद के दौरान भड़की हिंसा के बाद जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। उनके नेतृत्व में पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पाया और शांति व्यवस्था बहाल की।
100 करोड़ के सरकारी जमीन घोटाले का खुलासा
संभल-मुरादाबाद मार्ग पर स्थित करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए भू-माफिया ने अपने नाम करा लिया था। आरोप है कि इस पूरे खेल में कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत भी थी। जमीन पर अवैध रूप से चारदीवारी और फैक्ट्री तक बना दी गई थी।
केके बिश्नोई के मुताबिक, इस मामले की फाइलें वर्षों से सरकारी दफ्तरों में दबाकर रखी गई थीं। पुलिस और प्रशासन ने रिकॉर्ड खंगालकर पूरे मामले का खुलासा किया और कार्रवाई करते हुए जमीन को कब्जामुक्त कराया। इस प्रकरण में 31 नामजद आरोपियों सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
सख्त पुलिसिंग से बनी अलग पहचान
केके बिश्नोई उत्तर प्रदेश के उन आईपीएस अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने माफियाओं और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की है। उनकी कार्यशैली के कारण उन्हें कई लोग ‘संभल का सिंघम’ भी कहते हैं।

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